मुस्लिम रोजा भी रखेंगे..बढ़चढ़कर मतदान भी करेंगे
मुस्लिम साहित्यकारों और विचारक बोले-गैर जरूरी विवाद किया जा रहा पैदा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
रमजान में लोकसभा चुनाव की तारीखें पड़ने पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मसले पर जहां कुछ मुस्लिम नेताओं ने रमजान के महीने में वोटिंग कराने पर सवाल उठाया है, वहीं यहां के चिंतक एवं विचारकों का कहना है कि इस मसले पर राजनीति न की जाए। रमजान के महीने में चुनाव होना अच्छा है। लोग सुबह अधिक संख्या में वोट करेंगे।
चुनाव हो रहा है सही समय पर
चिंतक एवं विचारक तनवीर जाफरी का कहना है कि लोकसभा चुनाव तो अपने समय के अनुसार ही हो रहे हैं। रमजान चांद महीने के अनुसार हर साल 12 दिन पहले शुरू हो जाता है। इस लिए चुनाव भी रमजान के महीने में पड़ गए हैं। जाफरी का कहना है कि इस बार सुबह अधिक संख्या में लोग वोट डालेंगे। पिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार वोट का प्रतिशत बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इस पर राजनीति न की जाए। यह गैर जरूरी विवाद पैदा किया जा रहा है।
वोटिंग होगी अधिक
साहित्यकार वाहिद काजमी का कहना कि रमजान आएगा और मुसलमान पूरे जोश से रोजा रहेंगे और वोट भी करेंगे। रोजा रहने और रमजान महीने में चुनाव होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। रमजान में तो मुसलमानों का ईमानी और रुहानी स्तर और ज्यादा हो जाता है और उन्हें विश्वास है कि रमजान में ज्यादा वोटिंग होगी।