कॉल सेंटर कर्मी से गैंगरेप : बेकसूर वसीम को ट्रायल से बाहर करने की याचिका दायर
- 18 महीने से बिना किसी गलती के केस झेल रहा था वसीम मलिक
- पीड़िता की ओर से शिनाख्त के बाद किया था पुलिस ने गिरफ्तार
- नवंबर में एक और ऑटो गैंगरेप में गिरफ्तार आरोपियों के पकड़े जाने के बाद असली आरोपी आए थे सामने
- वसीम को 16 महीने बाद मिली थी अदालत से जमानत
अमरीश शर्मा
चंडीगढ़। 12 दिसंबर 2016 को काल सेंटर में काम करने वाली युवती से ऑटो चालक और उसके साथी की ओर से सामूहिक दुराचार मामले में ट्रायल झेल रहे बेकसूर वसीम मलिक को आखिरकार चंडीगढ़ पुलिस ने क्लीन चिट दे ही दी। थाना पुलिस ने केस में गलती को सुधारते हुए असली आरोपियों मोहम्मद इरफान और कमल हसन उर्फ दिल-दिल के पकड़े जाने के बाद बेसकूर वसीम मलिक के खिलाफ चल रहे ट्रायल से उसका नाम वापस लेने की याचिका मंगलवार को जिला अदालत में विशेष कोर्ट में दायर कर दी। याचिका पर 20 जुलाई को सुनवाई होगी।
आरोपियों के पकड़े जाने के करीब आठ महीने बाद आखिरकार पुलिस ने वसीम का नाम ट्रायल से वापस लेने के लिए याचिका दायर की है। पुलिस ने यह याचिका प्रशासक वीपी सिंह बदनौर, गृह सचिव और विभाग के आला अफसरों की अनुमति मिलने के बाद दायर की है। यह याचिका पुलिस ने अप्रैल में मंजूरी के लिए गृह सचिव के पास भेज दी थी। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद मंगलवार को याचिका दायर की गई।
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यह बनाया याचिका का आधार
पुलिस की ओर से दायर याचिका (प्रासिक्यूशन विड्रा) में दलील दी गई है कि नवंबर 2017 में मोहाली निवासी युवती से ऑटो गैंगरेप मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी मोहम्मद इरफान से पूछताछ में उसने दिसंबर 2016 में युवती से सामूहिक दुराचार की वारदात को कबूल किया था। इसके बाद पुलिस ने उसका डीएनए टेस्ट करवाया था। यह डीएनए उससे मैच हो गया था। इसके बाद पुलिस ने मामले में इरफान से पूछताछ के आधार पर सहआरोपी दिल्ली निवासी कमल हसन उर्फ दिल-दिल को गिरफ्तार किया था। उसकी डीएनए रिपोर्ट भी इस केस में पॉजीटिव आई थी।
पीड़िता के दूसरी बार हुए धारा 164 के बयान को भी बनाया आधार
पुलिस ने दोनों आरोपियों की डीएनए रिपोर्ट और पीड़िता के फिर से धारा 164 के तहत दर्ज कराए बयान को भी याचिका का आधार बनाया है। इसके अलावा पीड़िता ने दोनों आरोपियों की एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष शिनाख्त परेड में उनकी पहचान की थी। इसे भी पुलिस ने याचिका का आधार बनाया है। वहीं, वसीम मलिक का डीएनए इस केस में मैच नहीं हुआ था और पीड़िता ने अदालत में दिए बयान में उसे पहचानने से भी इनकार कर दिया था। वहीं, वारदात में इस्तेमाल ऑटो भी पहले पुलिस रिकवर नहीं कर सकी थी।
16 महीने जेल में रहने के बाद मिली थी जमानत
मामले में गिरफ्तार सेक्टर-52 निवासी वसीम मलिक को 16 महीने बाद 9 अप्रैल 2018 को अदालत से जमानत मिली थी। इससे पहले दो बार जिला अदालत से और एक बार हाईकोर्ट से उसकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी।
अदालत में बयान से मुकर चुकी है पीड़िता
12 दिसंबर 2016 को कॉल सेंटर में काम करने वाली युवती से सेक्टर-29 के जंगली एरिया में सामूहिक दुराचार हुआ। इसके बाद पुलिस ने 15 दिसंबर 216 को सेक्टर-52 निवासी वसीम मलिक को पीड़िता द्वारा बनवाए गए स्कैच के आधार पर गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया। वसीम के खिलाफ केस का ट्रायल भी शुरू हो चुका है। वहीं, पीड़िता अदालत में वसीम मलिक को पहचानने से इनकार कर चुकी है।
यह है मामला
12 दिसंबर 2016 को काल सेंटर में काम करने वाली युवती के साथ ऑटो चालक और उसके साथी ने सामूहिक दुराचार किया था। उसने सेक्टर-34 से घर जाने के लिए ऑटो लिया था। ऑटो में चालक और उसका साथी मौजूद था। दोनों ने चाकू के दम पर वारदात को अंजाम दिया था। मामले में पुलिस ने पीड़ित के बयान पर एक आरोपी का स्कैच बनाया था। स्कैच के आधार पर पुलिस ने आरोपी वसीम मलिक को गिरफ्तार किया था। वसीम मलिक की पुलिस ने छह दिन बाद गिरफ्तारी दिखा दी थी, लेकिन दूसरे आरोपी का पुलिस सुराग नहीं लगा सकी। वहीं पुलिस केस में ऑटो भी नहीं बरामद कर सकी थी। अदालत में पीड़िता युवक को पहचानने से इनकार कर चुकी है। डीएनए सैंपल भी उससे मैच नहीं हुए थे। मामले में मोड़ तब आया, जब नवंबर 2017 में कोचिंग से पीजी जा रही मोहाली निवासी युवती के साथ सेक्टर-56 में भी ऐसी ही वारदात हुई। मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी मोहम्मद इरफान के डीएनए को पुलिस ने जांच के लिए भेजा हुआ था। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि आरोपी 12 दिसंबर 2016 में सेक्टर-29 में हुए गैंगरेप में भी शामिल था। इसके बाद इंडस्ट्रियल एरिया थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहम्मद इरफान को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर उसका रिमांड लिया और उससे पूछताछ के आधार पर दूसरे आरोपी कमल हसन को गिरफ्तार किया था।