विधानसभा में बेअसर रहेगा विपक्ष का विरोध
समान मुद्दों के बावजूद शिअद-भाजपा नहीं देंगे आप का साथ
कर्ज माफी, बेअदबी, रेत खनन के मुद्दों पर अपने-अपने ढंग से सरकार को घेरेगा विपक्ष
हर्ष कुमार सलारिया
चंडीगढ़।
पंजाब विधानसभा के बुधवार को शुरू हो रहे बजट सत्र में विपक्षी दल विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी तो कर चुके हैं, लेकिन उनका विरोध बेअसर साबित होने के आसार भी बन चुके हैं।
रेत खदानों की नीलामी में सूबे के सिंचाई एवं बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह की कथित संलिप्तता को मुख्य विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (आप) ने मुद्दा बनाया तो शिअद-भाजपा गठबंधन ने इसे हाथोंहाथ लपक लिया। अब गठबंधन और आप, दोनों अपने-अपने तरीके से सरकार का विरोध करते हुए राणा गुरजीत के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही, गठबंधन ने राज्य में दलित उत्पीड़न को मुद्दा बनाने के साथ-साथ कांग्रेस सरकार पर बदले की सियासत करने का आरोप भी लगाया है। दोनों विपक्षी धड़े सूबे में बेअदबी के मामलों को लेकर भी विधानसभा में सरकार को घेरेंगे।
जानकारी के अनुसार, विधानसभा में विरोध को लेकर दोनों विपक्षी धड़ों ने जो रणनीति बनाई है, वह एक-दूसरे से अलग दिखाई देगी। विधानसभा के पहले सत्र में भी आप ने कांग्रेस के साथ-साथ शिअद पर भी राजनीतिक हमले करने का कोई मौका नहीं छोड़ा था। इस बार अगर आप की तरफ से कोई भी मुद्दा उठाया जाएगा तो शिअद उसमें साथ नहीं देगा। हालात यहां तक बेगानों वाले रहेंगे कि अगर आप किसी मुद्दे पर वाकआउट करेगी तो शिअद-भाजपा गठबंधन उनका साथ नहीं देगा और अगर गठबंधन किसी मुद्दे पर सदन से बाहर गया तो आप के विधायक उनका साथ नहीं देंगे। जाहिर है, इस तरह विभाजित विपक्ष सत्तापक्ष के लिए कोई बड़ी सिरदर्दी पैदा नहीं कर सकेगा और इसी का नतीजा है कि कांग्रेस विपक्ष को विरोध को लेकर गंभीर नहीं है।
विपक्ष को बोलने का पूरा मौका देंगे : राणा केपी
विधानसभा स्पीकर राणा केपी का कहना है कि पहले की भांति ही इस सत्र में भी विपक्षी सदस्यों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर देंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष को किसी भी मुद्दे पर विरोध जताने का पूरा हक है, लेकिन कुछ भी बोलते समय या अपने आचरण में सदन की मर्यादा और गरिमा को बनाए रखें। उन्होंने कहा कि पिछला सत्र काफी कम समयावधि का था, लेकिन इस बार विपक्ष के सभी सदस्यों को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी इस बात के पक्षधर हैं कि सभी सदस्यों को हरसंभव तरीके से सदन में अपनी बात रखने के लिए समय मिलना चाहिए। इसलिए वे इसे सुनिश्चित बनाएंगे।