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बिक्त्रस्म मजीठिया के कारण सरकार को लगा 915 करोड़ का चूना

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पूर्व राजस्व मंत्री के कारण सरकार को 915 करोड़ का नुकसान
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कांग्रेस ने सहकारी चीनी मिलों में पूर्व राजस्व मंत्री की मिलीभगत को किया उजागर
हाईकोर्ट के पूर्व जज से मामले की जांच कराने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पंजाब कांग्रेसी नेता सुखजिंदर राज सिंह लाली मजीठिया ने सूबे में नौ सहकारी चीनी मिलों में से आठ मिलों से संबंधित बिजली के टेंडर मामले में सरकार को 915 करोड़ रुपये की चपत लगने का मामला उजागर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में पूर्व राजस्व मंत्री की मिलीभगत सामने आई है।
पंजाब कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए लाली मजीठिया ने बताया कि आठ चीनी मिलों में को-जेनरेशन को अपग्रेड, आधुनिकीकरण और स्थापित करने के लिए टेंडर अलॉट करने में पूर्व सरकार ने घोर अनियमितता बरती, जिससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि पूर्व राजस्व मंत्री ने को-जेनरेशन के जरिए इस बिजनेस पर कब्जा जाने के उद्देश्य से सभी सहकारी चीनी मिलों को अपने हाथ में लेने की कोशिश की। इस घपले की विशेष जांच टीम से जांच कराने की मांग करते हुए लाली मजीठिया ने कहा कि यह प्रोजेक्ट वर्ष 2010-11 में चालू होना था। अब तक हुई देरी के कारण सरकार को 915 करोड़ रुपये का अनुमानित घाटा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह घाटा लगातार बढ़ रहा है और जब तक यह प्लांट चालू नहीं हो जाएंगे, घाटा बढ़ता रहेगा।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में पंजाब की आठ सहकारी चीनी मिलों के लिए शुगरफेड ने टेंडर जारी किए थे। उन्होंने कहा कि पूर्व राजस्व मंत्री ने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए अपने परिवार की एक कंपनी सुरैया इंडस्ट्रीज लि. को सीधे तौर पर चार मिलों का ठेका दिलवा दिया, जबकि बाकी चार मिलों का ठेका भी एक अन्य कंपनी ए टू जेड के नाम अलॉट कराया।
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उन्होंने कहा कि सहकारी चीनी मिलें वित्तीय तंगी झेल रही थीं और इन मिलों को उबारने के लिए को-जेनरेशन का फैसला लिया गया था। उन्होंने बताया कि 2008 में सुरैया इंडस्ट्रीज को नवांशहर, अजनाला, बटाला और गुरदासपुर की चीनी मिलों का और ए टू जेड कंपनी को मोरिंडा, बुड्डेवाल, नकोदर और फाजिल्का की मिलों का ठेका अलॉट किया गया था। उन्होंने बताया कि यह टेंडर एसआईएल की शर्तों पर आधारित थे और नियमों का उल्लंघन होने पर इन्हें तुरंत रद्द किया जाना चाहिए था। टेंडर की शर्तों के अनुसार, 11 अप्रैल, 2009 तक प्रत्येक मिल के लिए 2 करोड़ रुपये अग्रिम राशि जमा कराई जानी थी, जो नहीं कराई गई। ऐसे में टेंडर तुरंत रद्द होने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि टेंडर हासिल करने के बाद भी दोनों कंपनियों ने किसी भी मिल में काम पूरा नहीं किया। सुरैया ने केवल एक मिल में काम शुरू किया और अधूरा छोड़ दिया, जबकि ए टू जेड ने तीन मिलों में काम शुरू करके अधूरा छोड़ दिया।
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