आखिर किसने कहने पर कारपोरेशन ने लुटाए 12 लाख
- ऑडिट विभाग ने माना, अब नहीं हो सकती है रिकवरी
- कारपोरेशन को खराब ऋण वसूली की श्रेणी में डाला
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। चाइल्ड एंड वुमेन डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से कई साल पहले कुछ विभागों को दिए लोन और एडवांस की रिकवरी अब तक क्यों नहीं की गई है। इसे लेकर ऑडिट विभाग ने कारपोरेशन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। करीब 12 लाख रुपये की वसूली नहीं होने के चलते इसे खराब ऋण की श्रेणी में डाल दिया गया है। हॉल ही में ऑडिट विभाग ने कारपोरेशन को कई विभागों से लोन रिकवरी करने की हिदायत दी है। इसके साथ कहा कि इस धन की रिकवरी होनी आसान नहीं है, लेकिन कारपोरेशन को कोशिशें बरकरार रखनी चाहिए।
कारपोरेशन ने अपने इनकम टैक्स रिटर्न भी फाइल नहीं किए हैं। इसके साथ ही इन मदों पर टैक्स ऐट सोर्स (टीडीएस) भी नहीं काटा गया है। ऑडिट विभाग ने इसे कारपोरेशन की ओर से घोर लापरवाही मानी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कारपोरेशन ने अकाउंट्स की फिजिकल वेरिफिकेशन करने की जहमत ही नहीं उठाई। इनवेंटरीज का प्रॉपर रिकार्ड भी कारपोरेशन ने मेनटेन नहीं किया।
ऐसे बांट दिया गया सरकारी धन
इनमें नेशनल हाउसिंग फाइनेंस डेवलपमेंट कारपोरेशन ने यूटी की इस कारपोरेशन के 81,839 रुपये देने हैं। म्युनिसिपल कारपोरेशन के सेक्रेटरी की ओर 48,200 रुपये निकाले गए हैं। जीएमसीएच 32 की ओर 39,155 रुपये बकाया है। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड कारपोरेशन ने 26 हजार 508 रुपये की राशि कारपोरेशन को देनी है। चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन ने भी कारपोरेशन के 3472 रुपये चुकाने हैं। कंट्रोलर प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी ने भी 1295 रुपये कारपोरेशन के देने हैं। कुल मिलाकर यह अमाउंट 2 लाख रुपये से भी ऊपर है। ऑडिट विभाग ने यह ऑडिट 2011 का किया है, जिसमें यह खुलासे हैं।
शेल्टर होम हो चुका है बंद
करंट एसेट लोन एंड एडवांसिज के अगेंस्ट स्वधार शेल्टर होम को कारपोरेशन ने 9.71 लाख रुपये में दिए थे। यह राशि भी आज तक रिकवर नहीं की गई। इस रकम के मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। क्योंकि वह यूनिट (स्वधार शेल्टर होम) जिसे ग्रांट इन ऐड के तौर पर यह रकम दी गई थी, वह 15 जनवरी 2016 को बंद हो चुकी है।