15 काउंसिलर के सीक्रेट बैलेट पर हस्ताक्षर करने के चलते इसे बताया अवैध
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
नरवाना एमसी की 2 जनवरी की मीटिंग में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को दोनों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने इस प्रक्रिया में फिलहाल किसी भी प्रकार के दखल से पहले रिकार्ड देखने की बात कहते हुए रिकार्ड सील करने के आदेश दिए हैं।
याचिका दाखिल करते हुए अध्यक्ष सुरेश कुमार और उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार ने 2 जनवरी के अविश्वास प्रस्ताव को चुनौती दी। याचिका में कहा गया कि 11 दिसंबर को एक बैठक कर अविश्वास प्रस्ताव हेतु आवेदन डीसी को सौंपा गया। डीसी ने इस आवेदन के अनुसार 2 जनवरी को एसडीओ सिविल को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त कर दिया। याची ने कहा कि हाथ उठाकर वोटिंग की प्रक्रिया अपनाई गई जिसका याची ने विरोध किया और सीक्रेट बैलेट से वोटिंग की मांग की, जिसे रिटर्निंग अफसर ने मंजूर कर लिया। बैलेट पेपर पर लिखना था कि आगे इन्हें प्रधान व उप प्रधान रखना चाहते हो या नहीं। इसके बाद ओपन टेबल पर अपने हस्ताक्षरों के साथ 15 काउंसिलरों ने बैलेट पेपर डाले तथा एक काउंसिलर ने बिना कुछ लिखे केवल हस्ताक्षर कर बैलेट डाल दिया। याची ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने केवल हस्ताक्षर वाले बैलेट को भी याची के खिलाफ माना और अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जो गलत है। याची ने कहा कि बैलेट पर हस्ताक्षर करते ही इसकी सीक्रेसी भंग हो गई और ऐसे में इसे रद्द किया जाना चाहिए। वैसे भी नरवाना एमसी में 23 पार्षद हैं और अविश्वास प्रस्ताव के लिए 2 तिहाई बहुमत होना चाहिए जो 15.33 यानी 16 होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि पहले वे रिकार्ड देखना चाहते हैं ऐसे में कोर्ट ने रिकार्ड को सील करने के आदेश दिए हैं।