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राजीव गांधी ट्रस्ट से जमीन वापिस लेने पर हाईकोर्ट की रोक

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राजीव गांधी ट्रस्ट से जमीन वापस लेने पर रोक
- जमीन वापस लेने के फैसले को दी गई थी चुनौती
- हरियाणा सरकार ने पूर्व में दी थी चैरिटेबल ट्रस्ट को जमीन
- हरियाणा में नई सरकार बनने के बाद आवंटन को लेकर उठे थे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट (आरजीसीटी) को पूर्व कांग्रेस सरकार की ओर से आठ साल पहले आवंटित जमीन को वापस लेने के हरियाणा सरकार के फैसले को ट्रस्ट ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। ट्रस्ट को यह जमीन आंखों का अस्पताल बनाने के लिए दी गई थी, जिसे मनोहर लाल सरकार ने वापस लेने का फैसला लिया था। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के आदेश पर रोक लगाते हुए सरकार को 13 जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग की रिपोर्ट में राबर्ट वाड्रा की कंपनी और डीएलएफ के बीच गठजोड़ उजागर होने की बात कही गई है। इसके बाद हरियाणा की मनोहर लाल सरकार ने आरजीसीटी को आठ साल पहले हुड्डा सरकार की ओर से दी गई जमीन वापस लेने की तैयारी कर ली थी। अस्पताल बनाने की समय सीमा खत्म होने के बाद सरकार ने यह फैसला लिया था। हरियाणा सरकार का पंचायत विभाग अब इस जमीन को दोबारा हासिल करने की कार्रवाई शुरू कर ही रहा था कि ट्रस्ट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट ने दलील दी थी कि ट्रस्ट संबंधित जमीन पर अस्पताल बनाने में विफल रहा है। ट्रस्ट को 7 जनवरी 2012 तक अस्पताल बनाना था। बाद में उसे इस समय सीमा में विस्तार भी दिया गया, लेकिन अस्पताल नहीं बनाया गया। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट ने इसे भूमि अधिग्रहण प्रमाणपत्र का उल्लंघन मानते हुए आक्यूपेशन सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी राजीव गांधी ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के नाम पर यह ट्रस्ट बनाया गया है। करीब 4.8 एकड़ जमीन गुरुग्राम के उल्लावास गांव में स्थित है। राजीव गांधी ट्रस्ट को यह जमीन 2009 में लीज पर दी गई थी। उल्लावास नगर पंचायत को पंचायत विभाग ने राजीव गांधी ट्रस्ट को यह जमीन देने की अनुमति दी थी।
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