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जीएसटी डालेगा किसानों पर बोझ, बढ़ जाएगी लागत

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जीएसटी डालेगा किसानों पर बोझ, बढ़ जाएगी लागत
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खाद, कीटनाशक, खेती उपकरण और ट्रैक्टर की कीमतें बढ़ेंगी
किसानों की इनपुट कॉस्ट काफी बढ़ने की आशंका
एमएसपी में नहीं हुई खास बढ़ोतरी
अखिल तलवार
चंडीगढ़।
एक जुलाई से लागू हो रहा गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) किसानों पर भारी पड़ेगा। खेती में उपयोग की सभी चीजें इससे महंगी हो जाएंगी। किसानों की इनपुट कॉस्ट काफी बढ़ने की आशंका है। जबकि, फसलों का एमएसपी उस अनुपात में नहीं बढ़ा है।
जानकारी के मुताबिक, अभी तक खाद पर कोई टैक्स नहीं है, इस पर 12 फीसदी जीएसटी लगा दिया गया। कीटनाशकों पर 12 प्रतिशत एक्साइज टैक्स था, इसे बढ़ाकर 18 प्रतिशत जीएसटी कर दिया गया है। खेतीबाड़ी उपकरणों को भी अब तक टैक्स से मुक्त रखा गया था, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इन पर भी 12 फीसदी जीएसटी लगा दिया है। ट्रैक्टर पर पहले काफी एक्साइज टैक्स होता था, लेकिन यूपीए सरकार ने ट्रैक्टर को टैक्स मुक्त कर दिया था। अब एनडीए सरकार ने ट्रैक्टर पर भी 12 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया है। ट्रैक्टर पार्ट्स पर तो 28 फीसदी जीएसटी होगा।
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दिलचस्प बात यह है कि ट्रैक्टर इंडस्ट्री खुद ही मांग कर रही थी कि ट्रैक्टर पर 12 फीसदी जीएसटी लगा दिया जाए। इससे कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होगी। जुलाई में ही धान की फसल के लिए खाद और कीटनाशकों की जरूरत पड़ेगी। अब किसानों को इनकी ज्यादा कीमत चुकानी होगी।
माहिरों का कहना है कि इन सभी चीजों पर टैक्स बढ़ने के बाद किसानों की इनपुट कॉस्ट काफी बढ़ने की आशंका है। जबकि, उस अनुपात में फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं बढ़ाया गया है। इस बार धान का एमएसपी सिर्फ 80 रुपये ही बढ़ा है।

खाद सब्सिडी आधार से जोड़ी
किसानों को एक और आशंका है। केंद्र सरकार ने खाद पर मिलने वाली सब्सिडी आधार से जोड़ कर सीधे किसानों के बैंक खातों में देने का फैसला किया है। किसानों का कहना है कि सरकार सिर्फ एक बोरी यूरिया या डीएपी पर सब्सिडी दे रही है। जबकि, पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी के माहिर ढाई बोरी प्रति एकड़ की सिफारिश करते हैं। ऐसे में डेढ़ बोरी खाद किसानों को मार्केट रेट पर लेनी होगी, जो बहुत महंगी है। यूरिया का बैग 854 रुपये व डीएपी का 1750 रुपये (जीएसटी अलग) में पड़ेगा। वहीं, सब्सिडी तीन माह बाद आएगी, सारा खर्च अभी खुद करना पड़ेगा।
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किसान संगठनों ने की आंदोलन की तैयारी
किसान संगठनों ने खेतीबाड़ी इनपुट्स पर इतना ज्यादा जीएसटी लगाने के विरोध में आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि किसान खत्म हो जाएं। एक जुलाई को मीटिंग करके आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। वहीं, भाकियू (उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने कहा कि 30 जून को मोगा में इसे लेकर मीटिंग बुलाई है। उसमें ही संघर्ष की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
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