लड़कों के लिए लड़कियां बन रही चुनौती : बबीता फोगाट
- पीयू में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के कार्यक्रम में पहुंचीं अंतरराष्ट्रीय रेसलर
कहा- लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करें, माता-पिता का लें आशीर्वाद
बोलीं- पीयू से मिले सम्मान को ओलंपिक में मेडल में बदलूंगी
कोट...
सिर्फ एक ही दिन महिला दिवस क्यों? हर दिन क्यों नहीं। लड़कों यहां से संकल्प लेकर जाएं कि अगले महिला दिवस तक एक महिला या लड़की की रक्षा करेंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी बहादुरी का डंका बजा रही हैं। चाहे वह क्षेत्र कला का हो या फिर खेल का। महिलाएं अपनी शक्ति को पहचानें। लक्ष्य निर्धारित करें और जी जान से उसके लिए मेहनत करें। माता-पिता का आशीर्वाद लें। उसके बाद भगवान भी चाहे तो आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता। क्योंकि मां को भी भगवान का रूप माना गया है। वह बच्चे की पहली गुरु होती है। आज लड़कों के लिए लड़कियां चुनौती बन रही हैं। एक दिन वह आएगा कि यह चुनौती ही खत्म हो जाएगी। यह बात पीयूसीएससी की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय रेसलर बबीता कुमारी फोगाट ने कही।
उन्होंने आजादी में महिलाओं के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गांधी हो या फिर शिवाजी उनको कामयाबी इसलिए मिलती गईं कि उनके सिर पर मां का हाथ था। उन्होंने बेहतर कार्य किए। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि वह छोटी थी तो बहुत शर्मिली थी। पापा के सामने आने में भी हिचकती थी। पापा ने एक दिन पानी मांगा तो मेरी आवाज उनको पानी देने के लिए नहीं निकल पाई या धीमी निकली, लेकिन उसी पिता व मां ने मुझे आशीर्वाद दिया और मैं आगे बढ़ी। रेसलिंग में आई तो पूरा गांव परिवार की हंसी उड़ा रहा था, लेकिन माता-पिता का विश्वास अटल था। कामयाबी मिली तो उसी गांव की लड़कियों को भी मां-बाप गीता-बबीता की तरह देखना चाहते थे। उन्होंने कहा कि चूल्हा-चौका से बाहर निकलना गांवों में बड़ी बात है, लेकिन सभी को सोच बदलनी होगी। यदि हर माता-पिता उनके परिवार की तरह सोचेंगे तो हर लड़की उड़ान भरेगी। उन्होंने कहा, सिर्फ एक ही दिन महिला दिवस क्यों? हर दिन क्यों नहीं मनाया जाता। उन्होंने लड़कों से कहा, यहां से संकल्प लेकर जाएं कि अगले महिला दिवस तक एक महिला या लड़की की रक्षा करेंगे।
समाज को सोच बदलनी होगी
उन्होंने कहा, हर दिन खबरों में बच्चियों के साथ रेप की वारदात वह पढ़ती हैं तो गुस्सा आता है। यह समाज किधर जा रहा है। मानसिकता में बदलाव लाएं तभी गांव, जिला, राज्य व देश आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि लड़कियां शारीरिक रूप से मजबूत बनें, उसके बाद वह मानसिक रूप से और मजबूत हो जाएंगी। उन्होंने दंगल मूवी का जिक्र करते हुए कहा कि इस मूवी ने बहुत से परिवारों की सोच को बदलने की कोशिश की है। लड़कियों के प्रति सभी अपना नजरिया बदलें।
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छोटी बहन सिंगापुर में कर रहीं अभ्यास
बबीता की छोटी बहन नीतू रेसलिंग छोड़कर एमएमए यानी मार्शल आर्ट में कदम रख रही है, इस सवाल के जवाब में बबीता फोगाट ने कहा, वह सिंगापुर में एमएमए की ट्रेनिंग ले रही है। जल्द ही वह अपनी प्रतिभा दिखाएगी। देश का नाम रोशन करेगी।
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...जब बबीता की आंखों से निकले आंसू
एक लड़की ने महिलाओं की दशा पर एक नाटक प्रस्तुत किया तो सबकी आंखें नम हो गईं। ऐसे में बबीता फोगाट भी अपने आंसू नहीं रोक पाईं। उन्होंने मंच पर जाकर कहा, इंडिया का असली टैलेंट यहां है। नाटक की ऐसी प्रस्तुति दी कि कलेजा हिला दिया। इस दौरान रंगारंग कार्यक्रम भी हुए। महिलाओं का सम्मान भी किया गया। इस मौके पर डीएसडब्ल्यू इमैनुअल नाहर, प्रो. श्रुति बेदी, सचिव अमरिंदर सिंह आदि मौजूद रहे।