प्रशासन ने लौटाया डीपीआर, शहर में
अंतरराष्ट्रीय स्तर की बने सेेकेंड ग्रेन मार्केट
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट में सुधार कर दोबारा से कंसल्टेंट लाने के दिए निर्देश
- प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर का डीपीआर लाने को कहा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन सेक्टर-39 स्थित सेकेंड ग्रेन, फ्रूट्स एंड वेजिटेबल्स मार्केट का निर्माण कार्य स्पेन की तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर का करवाना चाहता है। यूटी प्रशासन ने कंसल्टेंट को निर्देश दिए हैं कि इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) और प्लान में सुधार कर दोबारा से लाया जाए। प्रशासन ने हॉल ही में कंसल्टेंट के साथ मीटिंग में इस संदर्भ में निर्देश दिए। इसके साथ ही करीब डेढ़ माह के अंदर सभी काम पूरे करने को कहा है।
पिछले साल प्रशासन ने नैवकोंस के साथ कंसल्टेंसी के लिए एमओयू साइन किया था, जिसके बाद से ही कंपनी के रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था, लेकिन अब प्रशासन ने रिपोर्ट में कमियां निकाली हैं। 2015 में फंड की कमी के चलते मंडी का काम रुक गया था। तीन साल बाद बोर्ड ने मार्केट का निर्माण कार्य दोबारा शुरू करने के संबंध में बीते माह ही कंसल्टेंट हायर करने के लिए टेंडर निकाला था। मंडी के शुरू न होने से व्यापारियों और किसानों में रोष है।
हाईकोर्ट ने दिए थे प्रशासन को निर्देश
2015 अगस्त माह में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को आदेश जारी कर मंडी का काम शुरू करने के निर्देश दिए थे। प्रशासन ने अपने एफिडेविट में कहा था कि वे 31 मार्च 2016 तक यहां मंडी शुरू कर देंगे, लेकिन कंसल्टेंट फाइनल न होने के चलते इसमें देरी होती गई। अब कंसल्टेंट की रिपोर्ट के बाद बोर्ड गवर्नमेंट फाइनेंशियल इंस्टीटूशन से 100 करोड़ के लोन के लिए अप्लाई करेगा। प्रशासन ने छह माह पूर्व बोर्ड को नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट से 100 करोड़ लोन लेने को हरी झंडी दी थी, लेकिन डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के न होने से यह काम लटक रहा था।
इसलिए बनी अलॉटमेंट पॉलिसी
प्रशासन की ओर से शॉप अलॉटमेंट के लिए भी पॉलिसी बनाई जानी है। मार्केट में अभी तक सिर्फ एक शेड और पांच टॉयलेट्स ब्लॉक्स का निर्माण करवाया गया है। सड़क का निर्माण होना बाकी है। इसके अलावा मूलभूत सुविधाएं देने का काम भी इसके बाद ही शुरू होगा। यह पूरा 300 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है।
यह सब कुछ बनना है तय
प्रशासन ने अपने प्लान में यहां पर मार्केट कमेटी ऑफिस, किसान सेवा केंद्र, कोल्ड स्टोरेज, कमिशन एजेंट्स के लिए ऑफिस ब्लॉक के निर्माण करवाने का फैसला लिया था। हाईकोर्ट के निदेशों के बाद ही 2015 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था। प्रशासन ने वर्ष 1990 में 75 एकड़ भूमि एक्वायर की थी और 1996 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जोकि बाद में बंद हो गया था। इसे दोबारा 2015 में शुरू किया गया। लेकिन ये कुछ माह बाद ही फिर से काम बंद हो गया था।