धमकी मिलने के आधार पर राज्य सभी को नहीं मुहैया करवा सकता सुरक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की सुरक्षा संबंधी याचिका को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि राज्य हर व्यक्ति को धमकियां मिलने के आधार पर सुरक्षा उपलब्ध नही करवा सकता। जब तक खतरा स्पष्ट और सामने प्रतीत न हो रहा हो तब तक सुरक्षा नहीं दी जानी चाहिए और किसको कितना खतरा है और उसको सुरक्षा देने की जरूरत है या नही यह जांचने का काम पुलिस का है।
चौधरी ने हाईकोर्ट में सुरक्षा की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। याचिका में चौधरी ने बताया था कि वह इंटक के क्षेत्रीय प्रमुख है। पिंजौर व कालका के कुछ असामाजिक तत्वों से उसको जान को खतरा रहता है। उसे कई बार धमकी भी मिल चुकी है। कालका भाजपा के एक नेता के पुत्र ने उस पर हमला भी किया था जिसके बाद पुलिस ने 5 मार्च 2017 को पिंजौर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने उसको एक सुरक्षा कर्मी उपलब्ध करवाया था। लेकिन कुछ दिन बाद उसका सुरक्षा कर्मी पुलिस वापस ले लिया गया। इस बीच पुलिस ने न तो आरोपी भाजपा नेता के पुत्र को गिरफ्तार किया और न ही कोई ठोस जांच की। ऐसी हालत में उसे अब जान को खतरा है।
याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि किस को कब गिरफ्तार करना है या पुलिस की जांच पर निर्भर है। अभी मामले की पुलिस जांच कर रही है। जांच के क्या परिणाम सामने आते हैं उसके बाद ही पुलिस कुछ कार्रवाई कर सकती है। रही बात सुरक्षा कर्मी वापस लेने की, तो पुलिस ने अपनी जांच में जान को खतरा नहीं पाया होगा। इसलिए सुरक्षा कर्मी वापिस लिया जा सकता है। बेंच ने कहा कि राज्य हर व्यक्ति को इस आधार पर सुरक्षा उपलब्ध नही करवा सकता कि केस दाखिल करने के कारण उसे जान को खतरा है या उसको जान से मारने की धमकी मिली हैं। इसी प्रतिक्रिया के साथ हाईकोर्ट ने सुरक्षा देने के आदेश जारी न करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।