सूख रहे पेड़-पौधे, भवन को भी नुकसान का खतरा, खेल मैदान और विद्यार्थियों के घूमने की जगह भी खत्म।
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह शहर के ऐतिहासिक वाईएमडी कॉलेज परिसर में लंबे समय से बना जलभराव अब केवल विद्यार्थियों के लिए परेशानी नहीं, बल्कि कॉलेज के अस्तित्व और उसके बुनियादी ढांचे के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। परिसर में जमा पानी के कारण जहां कॉलेज की हरियाली और पेड़-पौधे सूख गए हैं, वहीं लगातार नमी से भवन को भी नुकसान पहुंच रहा है। इसके बावजूद जिला प्रशासन और नगर परिषद की ओर से जल निकासी का कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।
कॉलेज परिसर में जगह-जगह पानी जमा रहने से विद्यार्थियों की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। कभी जहां छात्र खाली समय में परिसर में बैठते, घूमते और खेलकूद करते थे, वहां अब जलभराव के कारण उनका पहुंचना मुश्किल हो गया है। कॉलेज का खेल परिसर भी लगातार पानी की समस्या से प्रभावित है। छात्र इरसाद, जमील, आशिक व मुन्फेद का कहना है कि खेल मैदान और खुला परिसर किसी भी शैक्षणिक संस्थान का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, लेकिन जलभराव ने उनसे यह सुविधा भी छीन ली है।
कॉलेज परिसर की पहचान उसकी हरियाली और पुराने पेड़-पौधों से रही है। लंबे समय तक पानी जमा रहने के कारण कई स्थानों पर पौधे खराब हो रहे हैं और हरियाली प्रभावित हो रही है। छात्रों के अनुसार यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं हुई तो परिसर में मौजूद पेड़-पौधों को भी बड़े स्तर पर नुकसान हो सकता है।
प्रशासन और नगर परिषद से स्थायी समाधान की मांग
छात्रों और कॉलेज प्रशासन ने जिला प्रशासन तथा नगर परिषद से मांग की है कि कॉलेज परिसर का मौके पर निरीक्षण कर जल निकासी की स्थायी योजना तैयार की जाए। परिसर के आसपास के नालों की सफाई, जल निकासी के रास्तों की पहचान और आवश्यकता के अनुसार नई ड्रेनेज व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि बारिश के पानी को कॉलेज परिसर में प्रवेश करने से रोका जा सके।
कोट
पूरे शहर के जल भराव से निपटने के लिए करीब 16 करोड की लागत से योजना बनाई गई है, इस पर जल्द काम शुरू किया जाएगा । यह वाईएमडी कॉलेज के अलावा अन्य स्थानों की भी समस्या है। इससे निपटा जाएगा।
- संजय मनोचा, अध्यक्ष, नगर परिषद नूंह