सरकार द्वारा अनाज की लिफ्टिंग के लिए नियुक्त ठेकेदार के उठान में असफल होने के बाद आढ़ती अब खुद अनाज की लिफ्टिंग कराएंगे। इसके लिए सरकार ठेकेदार को दिए जाने वाले रेट के हिसाब से आढ़तियों का भुगतान करेगी। सोमवार को आढ़ती एसोसिएशन की बैठक में आढ़तियों ने अनाज खुद उठाने का फैसला लिया है।
सरकार ने किसानों की उपज तो खरीदी, लेकिन मंडियों से उसका उठान नहीं हो रहा है। उठान में ढिलाई के चलते मंडियां गेहूं की बोरियों के ढेर से अटी पड़ी हैं। इतना तो तब है कि जब कि पिछले सप्ताह खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री कर्ण देव कंबोज और जिला उपायुक्त एजेंसियों तथा ठेकेदारों को सख्त हिदायत दे चुके हैं। एजेंसियों के आला अधिकारी भी ठेकेदारों पर दबाव बनाने में असफल साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि बामुश्किल 10 फीसदी अनाज का ही उठान हो पाया है।
उठान का ठेका लेने वाले ठेकेदार के पास गाड़ियों की व्यवस्था कम है। पैसा ज्यादा बचाने के चक्कर में ठेकेदार ट्रांसपोर्टरों से भी समन्वय स्थापित नहीं कर पाए हैं। आलम यह है कि मंडियों में फसल लेकर आने वाले किसान गेहूं को खाली करने के लिए इधर-उधर जगह ढूंढते फिरते हैं। लिफ्टिंग ना होने के चलते आढ़ती भी परेशान हैं। एक तो यह डर है कि कहीं बारिश न हो जाए।
यदि ऐसा हुआ तो गेहूं भीग जाएगा और बोरियों को खाली करके दोबारा से गेहूं को सुखाकर तुलाई करवाने के बाद बोरियों में भरवाने का खर्च आढ़तियों को उठाना पड़ेगा। वहीं लिफ्टिंग न होने के चलते भुगतान में भी देरी हो रही थी। अभी तक आढ़तियों को दो खरीद का ही भुगतान हुआ है।
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-लिफ्टिंग न होने की आढ़तियों की समस्या मेरे भी संज्ञान में है। आढ़तियों से कहा गया था कि वह भी गेहूं का उठान करवा सकते हैं। जो खर्चा ठेकेदार को गाड़ी के हिसाब से दिया जाता है, वहीं खर्चा उन्हें भी दे दिया जाएगा। दोनों मिलकर उठान करेंगे तो जल्द ही सभी बोरियां गोदामों में पहुंच जाएगी।
- अशोक कुमार शर्मा, डीसी, पलवल।