नगर निगम आयुक्त पंकज राय ने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए यह फैसला लिया है।
सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार की तरफ से पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश के 12 जिले जिनमें पलवल, मेवात भी शामिल हैं, आंशिक सूखे की तरफ अग्रसर है। जिले में सिंचाई व पेयजल के लिए मुख्य तौर पर धरती का पानी का ही मुख्य स्रोत है। इसमें जल स्तर प्रतिवर्ष डेेढ़ से दो फीट तक नीचे की तरफ जा रहा है, जो चिंताजनक है।
जिले में जलस्तर का घटना अवश्य चिंताजनक है। वर्ष 2014 में जहां यमुना के किनारे का जलस्तर 25 फीट तक था, जो अब घटकर 35 फीट तक पहुंच गया है। हाइवे के साथ लगते गांवों में जलस्तर 60 से 70 फीट तक पहुंच चुका है। कहीं-कहीं तो स्थिति बहुत ही भयावह है जहां कि यह 100 फीट तक भी पहुंच चुका है।
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आंशिक सूखे की स्थिति तो है लेकिन अभी तक ये काबू में है। जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा है कि अबकी बार मानसून की स्थिति ठीक रहने वाली है, जो कि सुखद संकेत है। पानी का बचाव ही पानी का उत्पादन है, इसलिए किसानों को कृषि की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि कम पानी में काम चल जाए। किसानों को जागरूक करने के लिए नियमित तौर पर शिविर लगाए जा रहे हैं।
-डॉ. महावीर सिंह मलिक, कृषि वैज्ञानिक।
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प्रशासन की पहली प्राथमिकता आमजन को पेयजल उपलब्ध कराने की है। हथीन खंड के कुछ गांवों आलीमेव, नांगल सभा सहित करीब दर्जन भर गांवों में पेयजल की समस्या बनी हुई है। वहां टैंकरों से पानी के टैंक भरवा दिए गए हैं। वहां भेजे जा रहे टैंकरों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग कराई जा रही है। इसके अलावा जनस्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय में ऑनलाइन के जरिये जो पेयजल की शिकायतें जा रही हैं, उनमें से जिले की समस्याओं का तुरंत निदान कराया जा रहा है। पेयजल की समस्या न रहे, इसकी वह स्वयं नियमित तौर पर मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
- अशोक शर्मा, डीसी, पलवल।