पलवल के अटोहां चौक पर धरना देते किसान।
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पलवल। पिछले 10 माह से केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर चल रहा धरना मंगलवार को भी जारी रहा। धरनास्थल पर किसानों ने सरकार को जनविरोधी बताते हुए सरकारी नीतियों का विरोध जताया। किसानों ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण किसानों और मजदूरों की हालत बदतर हो गई है।
धरने में अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान धर्मचंद और सोहनपाल चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार के सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। भाजपा सरकार एक मंच से दूसरे मंच तक अपनी भाषा बदल देती है। खेती ऐसा काम है, जहां पूरा श्रम और पूंजी लगाने के बाद भी उपज की गारंटी नहीं होती है। फिर भी करोड़ों किसान मजबूरीवश खेती से जुड़े हैं। किसान लगातार रिकॉर्ड उत्पादन कर देश के अन्न भंडारों को भर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो किसानों को उनकी फसलों का उचित भाव मिल पा रहा है और न ही देश की बड़ी आबादी पर्याप्त अनाज हासिल कर पा रही है। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग ने सरकार से सिफारिश की है कि वह पंजाब व हरियाणा की तर्ज पर अन्य कृषि राज्यों से भी लाभकारी मूल्यों पर फसलों की खरीदारी करें। संयुक्त किसान मोर्चा फसलों पर जिस न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी की मांग कर रहा है, यह सिफारिश उसी मांग का समर्थन करती है।
किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता बादाम नंबरदार चिवाड़ी ने की, जबकि संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। धरने को किसान नेता डॉ. रघुबीर सिंह, रमेश चंद, दादा मठ्ठर, नरेंद्र सहरावत, जगदीश आर्य, धन्नी अलावलपुर, गोपी थानेदार, अच्छेलाल, रणजीत सिंह, अतर सिंह तेवतिया, मुंशीराम दुधौला, देवरत्न सरपंच, अशोक तेवतिया और शिवसिंह थानेदार ने संबोधित किया।