पलवल (अनूप पाराशर)। आज के समय में जहां लोग दूसरों के मुंह का निवाला भी छीनने का प्रयास करते हैं, वहीं पेशे से वकील और पृथला पंचायत समिति के सदस्य लाल सिंह तेवतिया अपने काम के बीच समय निकालकर भूखों को भोजन कराने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने इस काम में खुद के साथ ही युवाओं की एक टीम भी तैयार कर ली है। सभी लोग अपने-अपने घरों से भोजन बनवाकर लाते हैं और रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड आदि जगहों पर सड़कों पर बैठे लोगों और अनाथालयों में जाकर खिलाते हैं। उन्होंने इस काम के लिए रविवार का दिन चुना हुआ है।
नव युवा समाज सेवा समिति के नाम से चल रही उनकी संस्था में ज्यादातर शिक्षित युवा जुड़े हुए हैं। कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन में भी इन युवाओं ने जरूरतमंदों को भोजन कराने के अलावा उनके घरों तक पहुंचवाने में भी मदद की। समिति से जुड़े युवाओं का मानना है कि कोई भी भूखे पेट नहीं सोना चाहिए। भंडारे तो सक्षम लोग करते हैं च वहां भूखों की बजाय सक्षम लोग ही भोजन करने आते हैं। यदि वास्तव में भूखे को भोजन कराया जाए तो उसका मन प्रसन्न हो जाता है और खिलाने वाले को भी आत्मिक शांति का अहसास होता है। लाल सिंह तेवतिया का कहना है कि भूखों को भोजन कराने की प्रेरणा उन्हें युवा पंचायतों से मिली। इन पंचायतों में यह चर्चा रहती थी कि युवाओं को कोई रचनात्मक कार्य करना चाहिए। उन्होंने अपने साथियों से सलाह की और निर्णय लिया गया कि भूखे लोगों को भोजन कराया जाए। पहली बार जब वे भोजन कराने रेलवे स्टेशन पर गए तो वहां अनेक ऐसे लोग मौजूद थे, जो बिना भोजन किए ही सो रहे थे। कुछ ऐसे लोग भी मिले, जिन्हें दूर जाना था और ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। वह संस्था से जुड़े अमित भारद्वाज, मनोज वर्मा, सुमित, मोहित भारद्वाज, पवन तेवतिया, विक्की गर्ग, प्रवीण भारद्वाज, करण सौरोत, तरुण पाठक, आकाश भारद्वाज के साथ मिलकर न सिर्फ भूखों को भोजन कराते हैं, बल्कि रक्तदान के प्रति भी लोगों को जागरूक करने का काम करते हैं। वहीं घर-घर जाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का अभियान भी छेड़ा हुआ है। उनके द्वारा लोगों को कूड़ेदान भी वितरित किए, ताकि लोग गंदगी को सड़कों पर न डाले।
वर्जन-
हम क्षेत्र में स्थित अनाथालयों में भी भोजन कराने गए तो हमें काफी अच्छा लगा। यह सिलसिला अब रुकने वाला नहीं है और इस कार्य में अन्य युवा भी जुड़ रहे हैं। हमारा संगठन पूरी तरह सामाजिक है। किसी से एक रुपये भी दान नहीं लेते हैं। अपने घर से बनवाकर खाना लाते हैं। - लाल सिंह तेवतिया