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पलवल में जन्मीं सुषमा के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर

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पलवल। राष्ट्रीय नेताओं में शुमार भाजपा की वरिष्ठ नेत्री व पूर्व विदेश मंत्री पलवल में जन्मी सुषमा स्वराज के निधन की सूचना जैसे ही पलवल के लोगों तक पहुंची तो उनके परिवार और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। निधन की सूचना मिलते ही परिवार और आसपास के लोग उनके घर पहुंच गए तथा परिवार को सांत्वना दी। जिले के अन्य हिस्सों से जब लोग उनके पलवल पैतृक घर पहुंचे, तब तक परिवार के लोग दिल्ली जा चुके थे। काफी संख्या में पलवल से भी लोग सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि देने के लिए दिल्ली रवाना हो गए। उनकी पलवल से जुड़ी यादों को याद कर वे लोग आंसू बहा रहे हैं, जिन्होंने सुषमा का बचपन देखा था तथा आज वे बुजुर्ग होने के कारण उनको श्रद्धांजलि देने तक नहीं जा सकते हैं।
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अंबाला में अपने नाना के यहां रहकर पली बढ़ी हुई सुषमा स्वराज का जन्म पलवल में कानून गोयान मोहल्ला निवासी छैल मोहन भारद्वाज के घर में 1952 में हुआ था। उनके पिता छैल मोहन यहां के गोस्वामी गणेश दत्त सनातन धर्म कॉलेज में सुपरिटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे। वे एक कवि व अच्छे वक्ता थे। सुषमा स्वराज भी अपने पिता की तरह बोलने में माहिर थी तथा उन्हें वाकपटुता अपने पिता छैल मोहन भारद्वाज से मिली थी। जब सुषमा स्वराज मात्र सात-आठ साल की थी तब उनकी मां का निधन हो गया, जिसके बाद उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली। तब उनके नाना उन्हें, उनकी बहन वंदना शर्मा, भाई गुलशन व अरविंद को अपने साथ अंबाला ले गए। वहीं रहकर सुषमा स्वराज व उनके भाइयों तथा बहन ने शिक्षा ग्रहण की। पलवल में उनके दूसरे भाई गिर्राज शरण भारद्वाज, हनुमत भारद्वाज, हरिओम भारद्वाज अपनी मां माया देवी के साथ रहते थे। सुषमा के छोटे भाई अरविंद का पलवल में ही कुछ साल पहले बीमारी के चलते निधन हो गया था। उस समय वे केंद्र में विदेश मंत्री थीं। पलवल से उनका नाता होने के कारण अक्सर वे यहां आया करती थीं। वे जितनी बार भी पलवल आईं ऐतिहासिक पंचोवन मंदिर पर दर्शन करने अवश्य जाती थीं। उनका अपने सबसे छोटे भाई हनुमत भारद्वाज से ज्यादा लगाव था।
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पैतृक घर के आसपास के लोगों से था खासा लगाव
हरियाणा लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य व भाजपा नेता डा. हरेंद्र पाल सिंह राणा का कहना है कि सुषमा स्वराज का अपने परिवार से भी ज्यादा आस-पास रहने वालों से ज्यादा लगाव रहता था। वे बहुत ही मृदभाषी थीं तथा हर किसी से प्यार से बात करती थीं। डॉ. हरेंद्र पाल सिंह राणा बताते हैं कि अंबाला में रहते हुए तथा जब वे पहली बार विधायक बनने के बाद पलवल आई थीं तो उस समय उनके पूरे मोहल्ले में यहां पर ही टेलीफोन था, तो उनके यहां से ही वे फोन किया करती थीं तथा उनके पिता ठाकुर भारत पाल के पास काफी देर तक बैठकर बात किया करती थीं। उनके परिवार से उनका खासा लगाव था।
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सुषमा स्वराज को उन्होंने गोद में खिलाया है। जब वह मात्र सात-आठ साल की थी, तभी उसके नाना पलवल से उन्हें व उनके भाइयों व बहन को साथ अंबाला ले गए थे, लेकिन उसके बाद भी जब वह पलवल आती थी तो यहां मोहल्ले में सभी से अच्छे से मिलती थीं तथा उनका हाल-चाल पूछने उनके घरों पर भी जाती थीं।
-महेंद्र भारद्वाज, सेवानिवृत्त अधिकारी, बिजली बोर्ड
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विदेश मंत्री बनने से पहले पलवल दो बार आई थीं
विदेश मंत्री बनने से कुछ माह पहले ही वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव से मात्र एक माह पहले वे पलवल अपने सबसे छोटे भाई हनुमत शरण भारद्वाज के ओमेक्स सिटी में मकान के मुहूर्त पर आई थीं। उससे पहले वे अपने छोटे भाई अरविंद के निधन पर पलवल आई थी। उस समय भी वे पंचवटी मंदिर पर दर्शन करने गई थीं तथा महंत कामता दास महाराज से आशीर्वाद लेकर आई थीं। सुषमा स्वराज की इन यादों को पलवल के लोग याद कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि उनके पलवल से रिश्ते व लगाव को लोग हमेशा याद रखेंगे।
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सौतेली मां ने बताया प्रतिभावान
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की सौतेली मां माया देवी ने बताया कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि सुषमा स्वराज उनके बीच में नहीं रही है। उन्होंने कहा कि वह पलवल में मिलने के लिए समय समय पर आती रहती थी। सुषमा की भाभी सरोज शर्मा ने बताया कि सुषमा स्वराज का सभी के साथ अच्छा व्यवहार था। वह सभी से प्यार करती थी। जब भी घर पर आती थी तो घर के हर सदस्य से अलग से मुलाकात करती थी। वो बहुत समझदार थी और अपने भाईयों को भी सही सलाह देती थी। सुषमा स्वराज को आगे बढ़ाने में उनके पिताजी का सबसे बड़ा हाथा था। वो हमेशा सुषमा से कविता पाठ करवाते और भाषण लिखकर घर के कमरे में ही स्टेज बनाकर सुषमा से बोलने के लिए कहते थी। सुषमा स्वराज की सहेली कामनी ने बताया कि बचपन में सुषमा के साथ खिलौने से खेलती थी और झूला झूलती थी। उनके साथ बचपन की यादें जुड़ी हुई है।
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