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वद्यिर्थियों को नागरिकता संसोधन कानून के बारे में किया गया जागरूक

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पलवल। नागरिकता संशोधन कानून पर छात्रों को जागरूक करने के लिए बृहस्पतिवार को एसडी कॉलेज में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज की सहायक प्रोफेसर डॉ. निर्मल जिंदल व ग्रीन इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष जगदीश चौधरी ने विद्यार्थियों को नागरिक संशोधन कानून 2019 के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला का संयोजन सहायक प्रोफेसर डॉ. राजवीर सिंह ने किया।
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इस अवसर पर डॉ. निर्मल जिंदल ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून 2019 का मकसद पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन व पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता प्रदान करना है। इन देशों से आकर जो लोग वर्ष 2014 से भारत में रह रहे है, उन्हें नागरिकता प्रदान की जाएगी। लोगों को इस कानून के बारे में पूर्ण जानकारी नहीं है। इसलिए इसका विरोध कर रहे हैं।
मुस्लिम सुमदाय के लोगों को यह डर है कि नागरिक संशोधन कानून 2019 में उनके साथ भेदभाव हुआ है। वे सोचते हैं कि उन्हें भारत से निकाल दिया जाएगा, जबकि ऐसा नहीं है। मुस्लिम समुदाय के लोगों में यह भ्रम है कि नागरिक संशोधन कानून में मुस्लिम देशों से मुसलमानों को क्यों नहीं बुलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम देशों में तो मुसलमान बहुमत में है। उसके बावजूद भी कोई भी मुस्लिम व्यक्ति भारत की नागरिकता ग्रहण करना चाहता है तो वह इस कानून के अंतर्गत प्राप्त कर सकता है। भारत में सभी धर्मों के लोगों को समानता का अधिकार व धार्मिक आजादी है।
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ग्रीन इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष जगदीश चौधरी ने कहा कि देश के बंटवारे के दौरान काफी हिंदू पाकिस्तान में रह गए लेकिन उन्हें वहां प्रताड़ित किया गया। नागरिक संशोधन कानून 2019 में उन्हीं अल्पसंख्यकों को न्याय दिलाने की बात कही गई है। कुछ राजनैतिक दल अपने एजेंडे के लिए इसका विरोध कर रहे हैं। इस कानून के बारे में भ्रम पैदा किया जा रहा है। यदि इसके बारे में ठीक ढंग से लोगों को बताया जाए कि यह नागरिकता देने के लिए है तो लोग इसका समर्थन करेंगे।
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