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Palwal News: साइबर ठगी के पांच दोषियों को छह-छह साल का कठोर कारावास

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संवाद न्यूज एजेंसी
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पलवल। आधार आधारित भुगतान प्रणाली के जरिए अंगूठे के क्लोन का इस्तेमाल कर साइबर ठगी करने के मामले में दोषी करार पांच युवकों को अदालत ने छह-छह साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा सभी दोषियोंं पर छह-छह हजार रुपये के जुर्माने की भी सजा सुनाई है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायाधीश अंकिता शर्मा ने साइबर ठगी के 12 मामलों की सुनवाई करते हुए 12 फरवरी को पांच आरोपियों को दोषी करार दिया था। न्यायाधीश शर्मा ने कहा कि लोगों की मेहनत की कमाई इस तरह से लूटना संदिग्ध अपराध की श्रेणी में आता है। दोषियों को कड़ी सजा देना अन्य के लिए मिसाल बनेगी। मामले में एक महिला आरोपी सबूतों के अभाव में आरोपमुक्त कर दिया गया, जबकि चार आरोपियों को 12 मामलों में तथा एक आरोपी आमिर को 11 मामलों में सजा सुनाई गई है। जिला न्यायवादी विकास शर्मा द्वारा पेश सबूतों के आधार पर दोषियों को सजा सुनाई गई है। दोषियों ने साल 2021 में तहसील कार्यालय से निकलवाई जमीनों की रजिस्ट्रियों से अंगूठे का निशान लेकर क्लोन तैयार किया और जिले के दर्जनों लोगों के खातों से लाखों रुपये की ठगी कर ली।
जिला न्यायवादी विकास शर्मा व सहायक जिला न्यायवादी बृजमोहन ने बताया कि साल 2021 में जिले के शहर व सदर थाने में बड़े पैमाने पर साइबर ठगी के मुकदमे दर्ज किए गए। साइबर ठगों ने पलवल के रजिस्ट्री कार्यालय में दैनिक वेतन पर काम करने वाले गांव खटैला निवासी तुलाराम से मिलीभगत कर रजिस्ट्रियां हासिल कीं। रजिस्ट्रियों पर खरीदार व विक्रेताओं के लगे हुए अंगूठे के निशान व आधार कार्ड नंबर को लिया गया। उसके बाद अंगूठे का क्लोन तैयार कर आधार आधारित भुगतान प्रणाली के जरिए रुपयों की निकासी की। 10-10 हजार रुपये करके ठगों ने लोगों के खाते खाली कर दिए। मामले में पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि बिहार के छपरा निवासी आमिर हुसैन व जिला औरंगाबाद निवासी चितरंजन के खातों में साइबर ठगी की रकम जमा की गई थी। आमिर हुसैन व चितरंजन पलवल में किराये के कमरे में रहते थे। दोनों को गिरफ्तार किया गया। उनकी निशानदेही पर गाजियाबाद निवासी रोहित त्यागी, बिहार निवासी किरण को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के खातों को सील कर दिया।
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आरोपियों को अदालत में पेश कर पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। रिमांड के दौरान आरोपियों से 2078 रजिस्ट्रियों की कॉपी, एक बायोमेट्रिक मशीन, 11 डेबिट कार्ड, 270 सिम कार्ड, अंगूठा क्लोन रबड़, स्टांप मशीन, इलेक्ट्रिक केबल, पांच बोतल फोटो पॉलीमर रबड़ जेल, एक लैपटॉप, प्रिंटर-स्कैनर, एक लेमिनेशन मशीन, 220 अंगूठा क्लोन, आधार कार्ड के खाली फॉर्मेट, 68 प्लास्टिक कार्ड, 21 पैन कार्ड, 64 पासपोर्ट साइज फोटो, पांच आधार कार्ड, एक पेन ड्राइव, एक ड्राइविंग लाइसेंस, एक पासबुक व एक चेक बुक बरामद की गई। मामले में आरोपी विनय कुमार व तुलाराम को भी गिरफ्तार किया गया।
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शहर थाना में दर्ज मुकदमा नंबर 341, 357, 348, 355, 360, 426, 358, 351 व सदर थाना में दर्ज एफआईआर नंबर 143 व 156 की अदालत में सुनवाई शुरू हुई। 12 फरवरी को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायाधीश अंकिता शर्मा ने सबूतों के आधार पर आरोपी आमिर हुसैन, चितरंजन, रोहित त्यागी, विनय कुमार व तुलाराम को दोषी करार दिया, जबकि आरोपी किरण के खिलाफ पर्याप्त सबूत न मिलने पर बरी कर दिया गया। सोमवार को न्यायाधीश शर्मा ने दोषी करार दिए पांचों दोषियों को भादंसं की धारा 467 के तहत छह साल, धारा 468 में छह साल, धारा 120 में छह साल, धारा 420 में पांच साल, 471 और 66 सी में दो-दो साल की सजा सुनाई है। सभी दोषियों को छह साल तक कठोर कारावास काटना होगा।
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