फोटो 10 में है
कैप्शन: थैलीसिमिया ग्रस्त बच्चे के लिए रक्त देते हुए
- 27 बच्चों को चढ़ाया जाता है रक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
होडल। शहर में स्थित नवजीवन चैरिटेबल ब्लड सेंटर में ग्रुप का रक्त नहीं मिलने से थैलीसीमिया पीड़ित दो बच्चों की सांस फूलने लगी। बच्चों की खराब हालत को देखते हुए परिजन पास के अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने तुरंत रक्त चढ़ाने की बात कही लेकिन ब्लड बैंक में ग्रुप का रक्त नहीं मिला। रक्त नहीं होने की सूचना बिजली निगम के कार्यकारी अभियंता सत्तार खान को मिली। उन्होंने अपने कर्मचारियों के साथ रक्तदान कर थैलीसीमिया पीड़ित दो बच्चों को रक्त उपलब्ध करवाया।
दरसल शहर में 27 थैलीसीमिया बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें 10 से बीस दिन में रक्त की जरूरत पड़ रही है। बुधवार को बाबरी मोड़ स्थित नवजीवन चैरिटेबल ब्लड सेंटर में थैलीसीमिया पीड़ित 13 वर्षीय गांव गढ़ी पट्टी निवासी संगम व नूंह के गांव बीबीपुर निवासी राशिद के 5 वर्षीय पुत्र अल्फेज के परिजन अचानक ब्लड बैंक में रक्त के लिए पहुंचे लेकिन बैंक में उनके ग्रुप का रक्त उपलब्ध नहीं होने से परिजनों को चिंता होने लगी । थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए रक्त की कमी की सूचना ब्लड सेंटर के संचालक सतीश कुमार ने सोशल मीडिया के ग्रुप पर भेज दी। सोशल मीडिया के जरिये सूचना मिलने के बाद बिजली निगम कार्यकारी अभियंता सत्तार खान ने अपने कार्यालय की कर्मचारी हाकिम व रोहताश को लेकर ब्लड सेंटर पहुंच गए और थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए रक्तदान करवा कर रक्त उपलब्ध करवाया।
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थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के परिजनों ने बिजली निगम के कार्यकारी अभियंता सत्तार खान और उनके साथियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी वजह से आज इन बच्चों की जान बच पाई है। वहीं बिजली निगम के कार्यकारी अभियंता सत्तार खान ने लोगों से थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए रक्तदान करने की अपील करते हुए कहा कि मानव जीवन के अलावा रक्त का कोई अन्य स्रोत नहीं है जबकि इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को महीने में दो बार रक्त चढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि वह ऐसे पीड़ित बच्चों के लिए वर्ष में चार बार रक्तदान करते हैं।