पलवल। मुंबई रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण में हुई धांधली की जांच रविवार को भी चलती रही। कार्यवाहक एसडीएम अमित गुलिया कर्मचारियों के साथ पूरा दिन रिकॉर्ड खंगालते रहे। अधिगृहीत जमीन का अवार्ड घोषित होने से पूर्व हुई रजिस्ट्रियों व उनके रकबे की भी जांच की गई। वहीं मामले की जांच के लिए चंडीगढ़ से एफसीआर संजीव कौशल व फरीदाबाद रेंज कमिश्नर संजय जून के भी आने की चर्चा रही, लेकिन वे शाम तक भी नहीं पहुंचे। उम्मीद जताई जा रही है कि सोमवार को मामले की जांच के लिए उच्चाधिकारी पलवल पहुंच सकते हैं।
पिछले साल 12 नवंबर को एसडीएम कंवर सिंह कॉरिडोर के लिए अधिगृहीत जमीन का अवार्ड घोषित किया। शुरुआत में केवल चार गांवों का ही अवार्ड घोषित किया गया, जिनमें असावटी, जटौला, पृथला व मैदापुर शामिल है। गांव छपरौला, टहरकी, कलवाका व दहलाका गांव का अवार्ड घोषित नहीं किया गया। अवार्ड घोषित होने के साथ ही लाभार्थियों ने अवार्ड राशि पाने के लिए आवेदन किए। आवेदन करने वालों की संख्या 493 होने पर रेलवे ने आपत्ति जताई। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की गई। मुख्यमंत्री ने विजिलेंस टीम से जांच कराई और बृहस्पतिवार को विजिलेंस ने एसडीएम कार्यालय को सील कर मामले की जांच शुरू की। मामले की जांच में सामने आया है कि जिस 100 गज जमीन में सबसे ज्यादा हिस्सेदार बनाए गए हैं, उस जमीन की रेलवे को जरूरत ही नहीं थी। इसे बाद में किसी किसान को रास्ता देने के लिए अधिग्रहण किया गया है। चार गांवों की अधिगृहीत जमीन में पांच लाख रुपये के लिए आवेदन करने वालों में फरीदाबाद की पर्वतीय कालोनी के 33, मोहना गांव के 30, बल्लभगढ़ के बाबूनगर के 23 से अधिक लोगों को शामिल हैं। इसमें जींद जिले के भी कई लोग शामिल हैं। पटवारियों ने पांच से सात गज जमीन को 40 से 50 मालिकों को कई रजिस्ट्रियां कर बेचा है।
वर्जन-
रेलवे कॉरिडोर जमीन अधिग्रहण मामले की जांच की जारी है। इस मामले की जांच रिपोर्ट तैयार कर जल्द ही उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों व पटवारियों से पूछताछ की जा रही है। मामले में रेलवे अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी।
- अमित गुलिया, कार्यवाहक एसडीएम पलवल