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Palwal News: बारिश से किसानों के चेहरे खिले, लेकिन जलभराव बना मुसीबत

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बरसात से जलमग्न हुई तावडू शहर की सड़कें। - फोटो : सांकेतिक
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दिनेश देशवाल
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नूंह। बारिश का इंतजार कर रहे नूंह जिले के लोगों को मंगलवार को आखिरकार राहत मिली। सुबह से शुरू हुई रुक-रुक कर बारिश दोपहर बाद तक जारी रही, जिससे भीषण गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिली। वहीं, लंबे समय से सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे किसानों ने भी राहत की सांस ली। हालांकि, इस बारिश ने नूंह और तावडू समेत कई शहरी क्षेत्रों में जलभराव की पुरानी समस्या को एक बार फिर उजागर कर दिया। सड़कों और बाजारों में पानी भरने से आमजन, दुकानदारों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मंगलवार सुबह से ही नूंह, तावडू, पिनगवां, फिरोजपुर झिरका और पुनहाना सहित जिले के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होती रही। तावडू में सबसे अधिक 117 एमएम, पुनहाना में 60 एमए, नूंह में 30 एमएम तथा नगीना में 9 एमएम बारिश दर्ज की गई। वहीं, फिरोजपुर झिरका में मंगलवार को भी बारिश न होने से किसानों को मायूसी हाथ लगी।
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धान का रकबा घटा
इस बार मानसून की बेरुखी का सबसे अधिक असर कृषि पर पड़ा है। जून और जुलाई में पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की खेती प्रभावित हुई है। पिछले वर्ष जिले में 13,352 हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई हुई थी, जबकि इस वर्ष 23 जुलाई तक केवल 10,840 हेक्टेयर क्षेत्र में ही धान लगाया जा सका। इसके विपरीत किसानों ने कम पानी वाली फसलों की ओर रुख किया। परिणामस्वरूप बाजरे का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में करीब 26 हजार हेक्टेयर बढ़ गया, जबकि कपास का क्षेत्रफल भी 2,097 हेक्टेयर से बढ़कर 2,585 हेक्टेयर हो गया।
औसत से भी कम रही बारिश
बारिश के आंकड़े भी जिले में मानसून की कमजोरी की गवाही दे रहे हैं। एक जून से 31 जुलाई तक पिछले वर्ष जिले में 427 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी, जबकि इस वर्ष अब तक केवल 118.4 मिलीमीटर बारिश हुई है। यह सामान्य वर्षा 186.6 मिलीमीटर की तुलना में भी लगभग 37 प्रतिशत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि जून और जुलाई में बारिश की कमी का सीधा असर फसल की शुरुआती वृद्धि पर पड़ता है, जिसकी भरपाई बाद की बारिश से पूरी तरह संभव नहीं होती।
कृषि विज्ञान केंद्र, शिकोहपुर (गुरुग्राम) के कृषि प्रसार विशेषज्ञ डॉ. गौरव पपनै ने बताया कि इस बार जून और जुलाई में नूंह जिले में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसका असर फसलों की वृद्धि और उत्पादन दोनों पर पड़ेगा। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि अगस्त में अच्छी बारिश होती है तो फसलों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन शुरुआती नुकसान की पूरी भरपाई होना मुश्किल है।
बारिश पर निर्भर जिले की खेती

जिले में लगभग 70,512.60 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की खेती की जाती है। जिले की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर आधारित है और यहां की खेती काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है। किसानों का कहना है कि खरीफ फसलों के लिए जून और जुलाई की बारिश सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। यदि इन महीनों में पर्याप्त वर्षा नहीं होती तो अगस्त और सितंबर की अधिक बारिश भी उत्पादन में अपेक्षित सुधार नहीं ला पाती।

किसान बुधराम देशवाल, मोहित, भगत सिंह, रणजीत, अर्जुन पंवार, सद्दीक, मुबारिक और रिजवान ने बताया कि इस वर्ष शुरुआती बारिश नहीं होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित हुई है।
आज तक समाधान नहीं
बारिश ने जहां खेतों को राहत दी, वहीं शहरों में जलभराव की समस्या फिर सामने आ गई। नूंह शहर के गौशाला रोड, पुरानी पीडब्ल्यूडी रोड, बस स्टैंड के सामने एनएच-248ए, पुरानी अनाज मंडी, मुख्य बाजार, विष्णु कॉलोनी तथा वार्ड-6 और 7 के कई इलाकों में पानी भर गया। तावडू में भी कई स्थानों पर जलभराव से लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। दुकानदारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार बारिश के साथ यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका।
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स्थानीय नागरिक रवि मक्कड़, बल्लू शर्मा, खूबचंद माथुर, मुरली, जाकिर, पप्पू पंडित, मनोज शर्मा, सचिन माथुर और मुकेश गर्ग ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जल निकासी व्यवस्था को फेल बताया है।
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