संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ 26 से 28 नवंबर तक होने वाले पड़ाव की तैयारी के लिए संयुक्त किसान मोर्चा पलवल ने गांव महेशपुर, मंडकोला, जनाचोली, हथीन, होडल, गढ़ी, बंचारी में जनसंपर्क अभियान जारी रखा। गांवों में दौरा कर अधिक से अधिक किसानों से पड़ाव में पहुंचने की अपील की।
किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, सोहनपाल चौहान व धर्मचंद घुघेरा ने कहा कि किसानों ने देश की खेती और किसान को बचाने के लिए करीब 13 महीने ऐतिहासिक आंदोलन लड़ा। आंदोलन के दबाव में केंद्र सरकार ने नौ दिसंबर 2021 को किसान मोर्चा को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी, किसान मजदूर की कर्ज मुक्ति, बिजली संशोधन विधेयक की वापसी, पराली के जलने पर किसानों पर केस ने बनाने, प्राकृतिक आपदाओं से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा देने की मांगों पर सहमति व्यक्त की, परंतु दो वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक मांगों का समाधान नहीं हुआ। मांगों को लेकर किसान और मजदूर निर्णायक आंदोलन लड़ेंगे।
डॉ. रघुवीर सिंह व ताराचंद ने कहा कि जिस प्रकार से केंद्र सरकार किसान और खेती को बर्बाद कर रही है, इसी प्रकार मजदूरों के 44 श्रम कानून को बदलकर पूंजी पतियों के पक्ष में चार लेबर कोड बना दिए। कर्मचारियों के लिए न तो वेतन आयोग का गठन किया गया और न ही पुरानी पेंशन योजना को लागू किया जा रहा है। इसलिए 26 से 28 नवंबर को अटोहां चौक पर 72 घंटे के महापड़ाव में किसान, मजदूर और कर्मचारी काफी संख्या में मौजूद रहेंगे।