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ब्लाइंड लूटकांड में हो गया खुलासा: मास्टरमाइंड निकला रिश्तेदार, खेत में छिपाए 22 लाख और गहने; टोय गन से डराया

Wed, 08 Oct 2025 06:44 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, पलवल

सार

पलवल पुलिस को धौलागढ़ ब्लाइंड लूट कांड मामले में सफलता मिल गई है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जिनके पास से  22 लाख रुपए नकद और सोने के गहने बरामद किए गए हैं।
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सीसीटीवी में दिखे थे लुटेरे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिला पुलिस ने एसपी वरुण सिंगला के नेतृत्व में धौलागढ़ में हुई सनसनीखेज ब्लाइंड लूट की गुत्थी महज कुछ घंटों में सुलझाकर बड़ी सफलता हासिल की थी। क्राइम ब्रांच (सीआईए) पलवल प्रभारी पी/एसआई दीपक गुलिया की टीम ने अथक प्रयासों से लूट की वारदात में शामिल चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे 22 लाख रुपये नकद और सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं। एसपी वरुण सिंगला ने बताया कि छह अक्तूबर की रात करीब सवा एक बजे चार नकाबपोश लुटेरों ने धौलागढ़ गांव में गन प्वाइंट पर एक कारोबारी परिवार को बंधक बनाकर नगदी और जेवरात लूट लिए थे। 

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सभी आरोपी निकले बेरोजगार
जांच में खुलासा हुआ है कि धौलागढ़ ब्लाइंड लूट केस का मास्टरमाइंड रिश्तेदार निकला है। जिसने खेत में 22 लाख और गहने छिपाए थे। टोय गन से वारदात को अंजाम दिया था। चारों आरोपी बेरोजगार है। जल्दी अमीर बनने की चाह में पूरा प्लान रचा गया था।  

आरोपियों को उनके गांव से ही दबोचा
वारदात के बाद आरोपी परिवार की मोटरसाइकिल और स्कूटी लेकर फरार हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित ओमप्रकाश की शिकायत पर तुरंत केस दर्ज किया गया और विशेष टीमों को आरोपियों की धरपकड़ के निर्देश दिए गए। पुलिस टीम ने साइबर तकनीक और मुखबिर तंत्र की मदद से महज कुछ घंटों में वारदात का पर्दाफाश करते हुए सभी चारों आरोपियों को उनके ही गांव धौलागढ़ से धर दबोचा। आरोपियों की पहचान नवीन, सचिन, रविंद्र उर्फ रवि और धर्मेंद्र उर्फ मोनू, सभी निवासी धौलागढ़, के रूप में हुई थी।

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एसआईटी और सीआईए की निगरानी में हुई जांच
बीते दिनों कैंप थाना क्षेत्र के धौलागढ़ गांव में हुई डकैती ने सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की गश्त पर सवाल खड़े किर दिए थे। डकैती की यह वारदात आबादी वाले इलाके में हुई। बेखौफ अपराधियों ने वारदात को अंजाम दिया। वारदात की जांच स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) और क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (सीआईए) की निगरानी में तेजी से आगे बढ़ी।

खुलासे से पहले पुलिस के मुताबिक, बदमाशों ने रेकी के बाद डकैती की इस वारदात को अंजाम दिया था। बदमाशों को पहले से पता था कि घर में सीसीटीवी कहां लगे हैं। इसलिए घर में घुसते ही पहले सीसीटीवी बंद कर दिए। स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) और क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (सीआईए) की टीमें वारदात से जुड़े हर छोटे-बड़े साक्ष्य का विश्लेषण किया। घटनास्थल से फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) की टीम ने फिंगरप्रिंट, रस्सियों के टुकड़े और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए हैं।
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वारदात के बाद सीसीटीवी कैमरे किए बंद
जानकारी के अनुसार, बदमाशों ने वारदात के बाद घर में लगे सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए, ताकि कोई फुटेज हाथ न लग सके। पुलिस को जांच के दौरान यह भी पता चला है कि लुटेरों ने ओमप्रकाश की पत्नी से अलमारी की चाबी छीन ली और भीतर रखा कीमती सामान लूट लिया। घर के अंदर बेड पर पड़ा चाकू और खुली अलमारियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि बदमाशों ने जल्दबाजी में घर के हर हिस्से की तलाशी ली थी।

कुर्सियों पर रस्सियों से बांदा पति-पत्नी को
वारदात के समय पति-पत्नी को रस्सियों से कुर्सियों से बांध दिया गया था। जब बदमाश लूटपाट कर फरार हो गए तो दोनों ने किसी तरह कुर्सियों को एक-दूसरे के नजदीक लाकर काफी मशक्कत के बाद रस्सियों को खोला और खुद को मुक्त किया। इस साहसिक प्रयास ने जांच एजेंसियों को घटनाक्रम को समझने में मदद की।

वहीं, डॉग स्क्वायड को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाकर संभावित रास्तों की जांच की। पुलिस को यह भी संदेह है कि बदमाशों ने घर से निकलते समय चादरों को आपस में बांधकर नीचे उतरने का तरीका अपनाया था। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि पीड़ित ओमप्रकाश की दो टाइल फैक्ट्रियां हैं। पुलिस इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है कि कहीं कारोबारी की आर्थिक स्थिति को देखकर बदमाशों ने योजनाबद्ध तरीके से उसे निशाना तो नहीं बनाया।

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