केंद्र व प्रदेश सरकार गांवों को खुले में शौच मुक्त करने के विशेष अभियान चला रही हैं। वर्ष 2017 के अंत तक प्रदेश के सभी गांवों को खुले में शौच मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन पलवल शहर इस मामले में पिछड़ता नजर आ रहा है।
करीब तीन लाख की आबादी वाले शहर में 30 फीसदी से अधिक हिस्सा स्लम एरिया में आता है। लेकिन इन कॉलोनियों में सुलभ शौचालयों का अभाव है।
बाजारों में 10 हजार से अधिक दुकानें हैं, जिनमें दुकानदारों, उनके कारिंदों व आने वाले ग्राहकों की संख्या लाखों में हैं। खाना पूर्ति के लिए चार स्थानों पर शौचालय बनाए तो गए हैं, लेकिन वहां ना तो सफाई कर्मी हैं और न ही अन्य सुविधा। लिहाजा लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं।