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फिरोजपुर गांव का दर्द : कचरे की दुर्गंध में सांस लेने को मजबूर ग्रामीण

Tue, 16 Sep 2025 11:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
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छह साल से पंचायत की तीन एकड़ जमीन पर कूड़ा डंपिंग से ग्रामीण परेशान, दिया धरना
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राहुल राज

पलवल। जिले के फिरोजपुर गांव में पिछले छह सालों से पंचायत की तीन एकड़ जमीन पर अवैध कूड़ा डंपिंग ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। करीब 10 हजार की आबादी वाले इस गांव में कूड़े के ढेर से उठती दुर्गंध, मक्खियों का आतंक और मृत पशुओं का निपटान स्थानीय लोगों के लिए नारकीय जीवन का कारण बन गया है। गुस्साए ग्रामीण अब धरने पर बैठने को मजबूर हैं।

साल 2019 से नगर परिषद द्वारा पंचायत भूमि पर लगातार कचरा डाला जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि साल 2021 में भी उन्होंने धरना-प्रदर्शन किया था, जिसे तत्कालीन विधायक नयन पाल रावत के आश्वासन पर स्थगित कर दिया गया। उस समय नगर परिषद ने तीन महीने तक कचरा डालना बंद किया, लेकिन जल्द ही यह सिलसिला फिर शुरू हो गया।
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जिस जमीन पर डंपिंग यार्ड बनाया गया है, उसी जमीन को जिला प्रशासन ने 65 अनुसूचित वर्ग और बीपीएल परिवारों को आवास के लिए प्लॉट आवंटित किए थे। लेकिन आवंटित प्लॉट पर ही डंपिंग यार्ड बनने के कारण ग्रामीण यहां रह नहीं सकते। जिसके कारण कई लोगों ने तो घर ही नहीं बनवाया, वे किराये के मकान लेकर रहने को मजबूर है। इनमें से 12-13 परिवार, जिन्होंने अपने घर बना लिए, सबसे अधिक प्रभावित हैं। दुर्गंध और गंदगी ने जीना दुश्वार कर दिया है।



गंदगी के कारण फैल रहीं बीमारियां

फिरोजपुर गांव की गलियां, जहां हर बरसात में कचरे का गंदा पानी घरों में घुस आता है, यहां जिंदगी एक त्रासदी बन चुकी है। साठ वर्षीय जमुना देवी, जो बीते चार साल से यहां रह रही हैं, बताती हैं कि दुर्गंध और मक्खियों ने जीना दूभर कर दिया है। घर के हर कोने में मक्खियों का डेरा है, खाने-पीने की चीजों पर मक्खियां मंडराती रहती हैं। साल 2024 में उन्हें टीबी जैसी गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया। डॉक्टरों ने साफ कहा कि डंपिंग यार्ड की गंदगी और मक्खियां इसकी मुख्य वजह हैं। यह सिर्फ जमुना की कहानी नहीं, बल्कि फिरोजपुर गांव के कई लोगों की कहानी है।




गांव में डंपिंग यार्ड बनाने के कारण हमारा जीना मुश्किल हो गया है। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, धरना जारी रहेगा। -खजान ठाकुर, प्रदर्शनकारी

कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कूड़े ने गांव में रहना मुश्किल कर दिया है। पूरे गांव में मक्खियों का आतंक है। -नीहाल सिंह, प्रदर्शनकारी
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साल 2021 में झूठे आश्वासनों के बाद धरना खत्म करा दिया गया था, लेकिन इस बार वे तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक कूड़े का स्थायी निस्तारण नहीं हो जाता। -ओमन, प्रदर्शनकारी
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