जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की पलवल शाखा के प्रबंधक को गांव बामनीखेड़ा निवासी मुरारी लाल को बीमा राशि का ब्याज सहित भुगतान करने, मुआवजा व कानूनी खर्चा देने का आदेश दिया है।
बामनीखेड़ा निवासी 32 वर्षीया सुमन ने 28 सितंबर 2012 को एलआईसी की एक पालिसी 20 वर्ष के लिए ली। इसके लिए उन्होंने 789 रुपये की त्रैमासिक किश्त का प्रीमियम भी दिया था।
बीमा अवधि के दौरान ही छह जुलाई 2015 को सुमन की करंट लगने से मृत्यु हो गई थी। बीमा पालिसी की शर्तों व नियमों के अनुसार सुमन की मृत्यु होने के बाद उनके नामिनी पति मुरारी लाल को एक लाख 25 हजार की राशि मिलनी थी, लेकिन निगम ने उन्हें केवल 31,250 रुपये का क्लेम दिया। शेष 93,750 रुपये की राशि छह माह बाद देने का आश्वासन दिया।
मुरारी लाल ने कई बार एलआईसी से बाकी राशि का भुगतान करने को कहा, लेकिन निगम ने उसे क्लेम का भुगतान नहीं किया। इस पर उन्होंने उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर कर दिया। फोरम ने एलआईसी के पास कई नोटिस भेजे, पर एलआईसी की तरफ से फोरम के समक्ष कोई पेश नहीं हुआ। इस पर फोरम ने एक तरफा सुनवाई करते हुए अपना निर्णय सुना दिया। फोरम के अध्यक्ष जंगवीर सिंह व सदस्या खुशविंदर कौर तथा वीणा रानी ने अपने निर्णय में कहा है कि मुरारी लाल का क्लेम रद करना गैरकानूनी था। एलआईसी लैप्स, अनक्लेम्ड व अनियमित होने वाली पॉलिसियों से काफी मोटा धन कमाती है। अनपढ़ व सहायताविहीन लोगों को परेशान करने में भी वह आगे है।
ऐसे मामलों को कंपनी को अलग दृष्टिकोण से देखना चाहिए। फोरम का कहना था कि पॉलिसी 62,500 रुपये के बीमा धन के लिए थी। आधी राशि परिवादी को मिल चुकी है। शेष आधी राशि 31,250 रुपये की राशि नौ प्रतिशत ब्याज सहित वापस करने तथा मुआवजा व कानूनी खर्चे के रूप में 10 हजार रुपये देने के आदेश बीमा कंपनी को दिए।