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Palwal News: 35 हजार लोगों पर एक पीएचसी, उसे भी इलाज की जरूरत

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पीएचसी की छतों से दिखते लोहे के सरिये।
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शिकरावा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कभी भी हो सकता है हादसा
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रिजवान खान
नूंह। जिस अस्पताल में मरीज जिंदगी की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वह खुद सुरक्षित नहीं है। शिकरावा का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) अपनी जर्जर इमारत के कारण किसी बड़े हादसे की आशंका से घिरा हुआ है। टूटती छतें, दरकती दीवारें और बाहर निकले जंग लगे सरिये हर दिन मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को खतरे का अहसास कराते हैं। हालत इतनी खराब हो चुकी है कि अस्पताल के अधिकतर कमरे बंद हो चुके हैं। इसके बावजूद हजारों लोगों की स्वास्थ्य सेवाएं इसी भवन के भरोसे चल रही हैं। बरसात के मौसम में खतरा और बढ़ गया है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाए हैं।

पीएचसी करीब 35 हजार आबादी और 7 से 8 गांवों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। अस्पताल में कुल 15 कमरे हैं, जिनमें से 12 कमरे जर्जर होने के कारण बंद पड़े हैं। वर्तमान में केवल तीन कमरों से सेवाएं संचालित की जा रही हैं। अस्पताल में करीब 15 कर्मचारी कार्यरत हैं। यहां प्रतिदिन 40 से 45 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं, जबकि हर महीने लगभग 115 प्रसव कराए जाते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि जिस भवन में लोगों की जान बचाने का काम होना चाहिए, वही भवन अब खुद लोगों की जान के लिए खतरा बनता जा रहा है।
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जान जोखिम में डालकर करते हैं काम
अस्पताल में तैनात करीब 15 कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। मरीजों का कहना है कि इलाज के दौरान भी उनका ध्यान दवाओं से ज्यादा टूटती छत और कमजोर दीवारों पर रहता है। बरसात के दौरान पानी रिसने और प्लास्टर गिरने की घटनाएं खतरे को और बढ़ा देती हैं। कर्मचारियों के अनुसार हर समय यह डर बना रहता है कि कहीं कोई बड़ा हिस्सा अचानक गिर न जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि 2022 से लगातार भवन की मरम्मत और पुनर्निर्माण की मांग उठाई जा रही है। कई बार अधिकारियों को ज्ञापन दिए गए और समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। फरवरी माह में भवन निर्माण के लिए करीब 17 लाख रुपये मंजूर किए गए थे, मगर इतनी बड़ी और जर्जर इमारत के लिए यह राशि नाकाफी साबित हुई। आज भी भवन की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

कई बार लिखा गया पत्र
पीएचसी के एसएमओ डॉ. यावर लुकमान ने स्वीकार किया कि अस्पताल भवन की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि भवन के गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है और विभाग को कई बार पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। अस्पताल का स्टाफ भय के माहौल में अपनी जिम्मेदारियां निभाने को मजबूर है।
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कोट
सिकरावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के जर्जर भवन की मरम्मत के लिए उच्च अधिकारियों को लिखा गया हैं। उम्मीद है कि जल्द समस्या का समाधान कराया जायेगा। जर्जर भवन स्टाफ व मरीजों के लिए खतरा है। -डॉ. ज्योत्स्ना, सिविल सर्जन नूंह।
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