29 सितंबर से खरीद शुरू करने की हुई थी घोषणा
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। धान का सीजन खत्म होने को है, लेकिन पलवल अनाज मंडी में सरकारी खरीद केंद्र पर इस बार धान का एक दाना तक नहीं खरीदा गया है। सरकार ने 29 सितंबर से सरकारी खरीद शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन सीजन के अंतिम दौर तक भी खरीद नहीं हो सकी। पिछले वर्ष इसी मंडी में 48,783 क्विंटल धान की सरकारी खरीद हुई थी। इस बार खरीद शून्य रहने से किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए निजी आढ़तियों या आसपास के दूसरे खरीद केंद्रों का रुख करना पड़ा है।
मार्केट कमेटी के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में 1509 किस्म के करीब 3 लाख 98 हजार क्विंटल बासमती धान खरीदा गया है, जबकि गैर-बासमती धान की सरकारी खरीद नहीं हुई। सरकार ने गैर-बासमती धान के लिए 2,441 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित किया था। इसके बावजूद किसान सरकारी केंद्र पर अपनी फसल नहीं बेच सके।
मंत्री के दौरे पर कटे पांच गेट पास, फिर भी नहीं हुई खरीद
छह अक्तूबर को खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर के मंडी निरीक्षण के दौरान पांच गेट पास काटे गए थे। उस दिन करीब 250 क्विंटल धान की आवक हुई थी, लेकिन नमी अधिक होने के कारण खरीद नहीं हो सकी। वेयरहाउस एजेंसी के अधिकारी बलदेव सैनी के अनुसार, धान में नमी की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक थी, इसलिए खरीद नहीं की गई। कुछ दिन इंतजार करने के बाद किसान अपनी फसल वापस ले गए। इसके बाद से मंडी में सरकारी खरीद नहीं हो सकी है।
नमी का हवाला देकर लौटाने का आरोप
किसानों का कहना है कि हर साल फसल बेचने के दौरान नमी और अन्य तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ता है। इस बार भी सरकारी खरीद शुरू होने की घोषणा के बावजूद उन्हें निराशा हाथ लगी। खरीद नहीं होने के कारण कुछ किसानों को निजी आढ़तियों को कम कीमत पर धान बेचना पड़ा, जबकि कुछ अपनी फसल आसपास के दूसरे केंद्रों पर ले गए।
मंडी में अबतक खरीद(क्विंटल)
1509 धान 398012
बाजरा 31925
कपास 3739
किसानों से बातचीत
धान को बेचने के लिए फसल मंडी स्थित सरकारी केंद्र पर लेकर गए, लेकिन वहां कर्मचारियों अधिक नमी का हवाला देकर फसल खरीदने से मना कर दिया। - दीपचंद, जनौली
पलवल मंडी में खरीदे नहीं जाने पर होडल स्थित सरकारी केंद्र पर ले जाकर फसल को बेचना पड़ा। इस कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली का खर्च भी झेलना पड़ा है। - रमेश, अलावलपुर
गैर बासमती धान बेचने कई बार सरकारी केंद्र आए, लेकिन हर बार कोई न कोई कारण बता कर मना कर दिया गया, कभी नमी तो कभी पोर्टल न चलने का बहाना बनाकर नहीं खरीदा गया। - सुंदर, बडौली
सरकारी केंद्र पर धान खरीद न होना बहुत शर्मिंदगी की बात है। खरीद न होने से किसानों को अपनी फसल अन्य केंद्रों पर ले जाकर बेचनी पड़ रही है। - गौरव तेवतिया, चेयरमैन, हरियाणा स्टेट आढ़ती एसोसिएशन
वर्जन
मंडी में अभी तक सरकारी खरीद के लिए धान आया नहीं है जो आया था वह खरीद के मानक पूरे नहीं कर पाया, जिसके चलते खरीद नहीं हो सकी। हमें उम्मीद है कि बचे दिनों में सरकारी खरीद के लिए धान आएगा। - लता, सचिव, मार्केट कमेटी