बारिश के कारण बूस्टरों के चैम्बर भी पानी से लबालब, मोटरें भी डूबीं
संवाद न्यूज एजेंसी
होडल। जन स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते गांव गढ़ी पट्टी में ग्रामीण गंदा और बदबूदार पानी पीने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं विभागीय लापरवाही के कारण गांव में स्थापित बूस्टरों के ढक्कन खुले पड़े रहते हैं, जिनमें बरसाती पानी के अलावा आसपास पड़े गोबर का गंदा पानी, धान के खेतों में डाली गई जहरीली और कीटनाशक दवाइयुक्त पानी भी बूस्टर में घुस रहा हैं। यह पेयजल लाइनों के माध्यम से घरों तक पहुंच रहा है। गंदा पानी पीने के कारण गांव में गंभीर बीमारी फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
वहीं, अधिक बरसात के कारण गांव स्थित बूस्टरों के चैम्बर भी पानी से लबालब पड़े हैं, जिनमें रखी बिजली की मोटरें भी पानी में डूबी हुई हैं। इस कारण पिछले कई दिनों से ग्रामीण पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। लोगों ने अब इस मामले में सोशल मीडिया का सहारा लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले से कई बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। ग्रामीण शीघ्र ही एसडीएम और जिला उपायुक्त को शिकायत देंगे।
गढ़ी पट्टी निवासी राजेंद्र प्रधान, जगराम, प्रभू, राकेश, हेतराम आदि का कहना है कि गांव में स्थापित बूस्टर के चैम्बर में पिछले कई दिनों से बरसाती पानी भरा हुआ है, जिसके कारण बिजली की मोटर आदि भी पानी में डूबी हुई हैं। चैम्बर में पानी भरने के कारण पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी है। ग्रामीणों ने बताया कि जिस जगह पर पर बूस्टर बना हुआ है, वह जगह सड़क से काफी नीचे है। बूस्टर का ढक्कन खुला होने के कारण बरसाती पानी के साथ नालियों का गंदा पानी भी अंदर घुस जाता है। सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतु भी बूस्टर में प्रवेश कर जाते हैं। बूस्टर के आसपास घास और झाड़ियां खड़ी हुई हैं। जगह की पिछले काफी समय से सफाई तक नहीं कराई गई है। ग्रामीणों का कहना था कि गंदे पानी की आपूर्ति के कारण गांव में गंभीर बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। इस मामले में कई विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है लेकिन कोई समाधान नहीं किया गया है।
6.5 करोड़ की लागत से बने बूस्टर के ढक्कन गायब
गांव में स्थापित दूसरे बूस्टर की इससे भी अधिक दुर्दशा है। इस बूस्टर से भी गांव के कुछ हिस्से में पेयजल आपूर्ति होती है। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग दो महीने पहले ही इसका निर्माण हुआ है। इस बूस्टर का ढक्कन खुला पड़ा रहता है, जिसमें सांप व अन्य जहरीले कीट प्रवेश कर जाते हैं। अंदर कूड़ा करकट पड़ा रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि विभाग द्वारा इस बूस्टर पर लगभग साढ़े छह करोड़ रुपये खर्च किया गया है, लेकिन दो महीने में ही बूस्टर के कमरे और बाहर का फर्श जर्जर हो गए हैं।
इस बार बारिश अधिक है। बूस्टर लो डाउन एरिया में है। चैम्बर में भरे पानी को इंजन के माध्यम से निकलवाया जाएगा। बूस्टर के ढक्कन खुले होने की जानकारी मिली है। फ्रेम बनवाने का आर्डर दे दिया है। तीन दिन में फ्रेम लगवा दिए जाएंगे। - अजय कांगडा, एसडीओ