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हाईटेक पंचायतें: सरपंचों के लिए डगर हुई कठिन

Sun, 05 Jun 2016 05:22 PM IST
अमर उजाला, ब्यूरो
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पंचायत पद
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सरकार ग्राम पंचायतों को हाईटेक बनाने की तैयारी में है। अब पंचायतों में बहुत कुछ नया होगा, जो पहले नहीं था। फोकस बस इसी बात पर है कि पंचायती कामकाज को पारदर्शी कैसे बनाया जाए। सरकार चाहती है कि सभी काम ऑनलाइन हों, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाएगी और पंचायतों की मनमानी पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
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 अगर हम  ग्राम पंचायतों की शैक्षणिक योग्यता, काम के तरीके और संसाधनों की बात करें तो सरपंचों के लिए यह डगर कठिन व चुनौती से भरी है। शैक्षिक योग्यता लागू कर सरकार ने भले ही आठवीं व दसवीं पास सरपंचों का जुगाड़ कर लिया है, लेकिन 70 प्रतिशत से अधिक सरपंच सक्षम नहीं हैं। सरपंच कंप्यूटर एवं लैपटॉप पर उंगलियां नहीं चला सकते। मुश्किल इतनी भर नहीं हैं, गांवों में बिजली और इंटरनेट सेवायें भी उपलब्ध नहीं हैं, जोकि डिजिटल पंचायतों के लिए समस्या बनेंगी।

 इसके साथ ही प्रदेश सरकार गांवों में ग्राम सचिवालय बनवा रही है। तमाम सेवाओं को आधार से लिंक किया जा रहा है। पत्राचार के लिए ई-मेल को बढ़ावा दिया जा रहा है। ये तमाम बदलाव नई पंचायतों के लिए एक दम नए हैं। कागजों में मीटिंग करना और ग्रामीणों को लेखा जोखा न देना अब पुराने दिनों की बात हो चुकी हैं। वहीं कुछ सरपंच आज भी सोच रहे हैं कि सिस्टम वही रहेगा। स्वाभाविक तौर पर नये बदलावों में मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक अनुमान के अनुसार जिले में करीब 60 प्रतिशत सरपंचों के पास स्मार्ट फोन ही नहीं है। 40 साल से ज्यादा उम्र वाले ज्यादातर सरपंच फोन का इस्तेमाल सिर्फ बातचीत के लिए ही करते हैं, तथा इंटरनेट, फेसबुक, व्हाटस एप से दूर ही रहते हैं।
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क्या कहते हैं सरपंच :
गांवों में संसाधनों की जरूरत है। शौकिया तौर पर मोबाइल के माध्यम से फेसबुक व व्हॅाटस-एप चलाना अलग बात है। मगर जहां काम की समय सीमा और बाध्यता हो वहां संसाधन जरूरी हैं। कंप्यूटर के इस्तेमाल के लिए हर पंचायत के पास एक एक्सपर्ट होना जरूरी है। इसके साथ ही गांवों में बिजली कुछ ही घंटे आती हैं, यह भी बड़ी समस्या है। सरपंचों का कहना हैं गांवों में संसाधन बढ़ाए जाने चाहिए। बामनीखेडा गांव के सरपंच महावीर शर्मा जोकि विदेश से एमटेक करके लाखों रुपये का कंपनी का पैकेज छोड़ कर राजनीति में उतरे हैं उनका कहना है कि संसाधन जुटाने के लिए सरकार को पंचायतों को विशेष बजट देना चाहिए।
 

-हाईटेक करने का फैसला पारदर्शिता के लिए किया गया है। शुरूआत में सरपंचों को दिक्कतें आ रही हैं, धीरे धीरे काम की जानकारी हो जाएगी। सभी काम नियमानुसार ही करने होंगे।
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-दीपक यादव, डीडीपीओ, पलवल।
 
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