पलवल। संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर चल रहे किसान आंदोलन के तहत धरना स्थल पर बृहस्पतिवार को किए जाने वाले प्रदर्शन की तैयारियों में किसान नेता जुटे रहे। किसान नेता जिले के किसानों से संपर्क कर उन्हें 26 नवंबर को होने वाले प्रदर्शन में पहुंचने का निमंत्रण देते रहे। बताया गया कि 26 नवंबर को अटोहां मोड़ पर धरना स्थल पर आंदोलन के एक साल पूरा होने पर एतिहासिक किसान दिवस के रूप में मनाया जाएगा। बृहस्पतिवार को किसान आंदोलन की अध्यक्षता चेतराम मेंबर मित्रोल ने की तथा संचालन रूपराम तेवतिया ने किया।
धरना स्थल पर बैठे हुए किसानों को संबोधित करते हुए किसान नेता स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती तथा रूपराम तेवतिया ने कहा हिंदुस्तान का किसान आंदोलन पूरी दुनिया का एक एतिहासिक आंदोलन बन गया है आंदोलन देश की खेती किसान और गरीब जनता के लिए खाद्य सुरक्षा को बचाने का आंदोलन है। जनता के सभी वर्गों के सहयोग से चलने वाले आंदोलन ने तानाशाह मोदी सरकार को झुकने के लिए मजबूर किया और उन्होंने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर कैबिनेट से भी पास करा दिया। यह इस देश के किसान और गरीब जनता की जीत है। किसान नेताओं ने कहा इसी के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, बिजली संशोधन विधेयक की वापसी, मजदूरों के लिए बनाए गए 4 लेबर कोड को वापस कर उनकी सुरक्षा के लिए कानून बनाना, किसानों पर बनाए गए सभी मुकदमों को वापस करना, आंदोलन में शहीद हुए किसानों के लिए पुनर्वास और आर्थिक सहायता देना तथा सभी प्रकार के जनविरोधी फैसलों को वापस लेने पर किसान आंदोलन स्थगित किया जाएगा। किसान नेताओं ने कहा 26 नवंबर को संयुक्त किसान मोर्चा के निर्णय के अनुसार पलवल मोर्चे पर भारी संख्या में किसान, मजदूर, कर्मचारी, छोटे दुकानदार ,महिलाएं और युवा भाग लेकर केंद्र और राज्य सरकारों को चेतावनी देंगे। अब देश और प्रदेश की जनता सरकार के जनविरोधी फैसलों को स्वीकार नहीं करेगी। धरना स्थल पर चौपाई और रागनियों का आयोजन भी किया जाएगा।
वहीं किसान नेताओं ने गांव-गांव जाकर किसानों से संपर्क कर 26 नवंबर को धरना स्थल पर पहुंचने का निमंत्रण दिया। इस अवसर पर राजेंद्र सिंह गरोठ, राजेंद्र सिंह बैंसला, श्रीचंद महाशय, हुकम सिंह चौहान, रोशन लाल आर्य, अच्छेलाल करतार सिंह, पोहपसिंह डागर, वीर सिंह चौहान ने संबोधित किया।