होडल अनाज मंडी में बिकने के लिए आई मूंग की फसल।
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होडल। एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुना करने व एक-एक दाना फसल खरीदने के दावे करते नहीं थक रही, वहीं दूसरी ओर आज भी किसान अपनी फसलों को बेचने के लिए मंडी में कई-कई दिनों तक पड़ा रहता है। बाद में मजबूरी में किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों में बेचनी पड़ती है। किसानों द्वारा इस समस्या को बार-बार सरकार व प्रशासन के आगे रखने के बावजूद उन्हें व्यापारियों व मंडी अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले शोषण को सहना पड़ रहा है। ऐसा ही अब मूंग व दलहन फसल को लेकर किसानों के साथ हो रहा है। अनाज मंडी में मूंग व दलहन फसल की सरकारी खरीद नहीं की जा रही है। यहां रोज हजारों क्विंटल मूंग की आवक हो रही है। लेकिन सरकारी खरीद शुरू नहीं की गई है। इस कारण यहां सैकड़ों क्विंटल दलहन की फसल पड़ी हुई है। मूंग का समर्थन मूल्य इस बार सरकार ने 6975 तय किया है लेकिन मंडी में यह 4500 से 4700 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास ही बिक रही है। ऐसे में किसानों को करीब दो हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि सरकार मूंग की सरकारी खरीद शुरू करवाएं।
किसानों का आरोप है कि मंडी प्रशासन और व्यापारियों द्वारा मिलीभगत कर उन्हें लूटा जा रहा है। सरकार के समर्थन मूल्य से दो हजार कम मूल्य पर व्यापारी वर्ग किसानों की मूंग व दलहन फसल को खरीदकर उन्हें धोखा दे रहे हैं।
किसान राम किशन व धर्मवीर का कहना है कि एक तो मौसम के कारण मूंग का उत्पादन कम हुआ है। ऊपर से अब अधिकारी व व्यापारी मिलकर किसानों को लूट रहे हैं। मूंग की सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण किसानों को मजबूरी में दो हजार रुपये कम में फसल की बिक्री करनी पड़ रही है। किसान नेता केशव देव शर्मा का कहना है सरकार की करनी व कथनी में बहुत बड़ा फर्क है। लोगों का कहना है कि मंडी की सचिव कार्यालय में आती ही नहीं, किसान अपनी समस्या किस के सामने रखें यदि वह आ भी जाए तो किसानों को कार्यालय में घुसने नहीं देती।
कांग्रेस विधायक उदयभान ने कहा कि केंद्र सरकार ने सामान्य धान के समर्थन मूल्य तो बढ़ा दिए, लेकिन किसानों को वह बढ़ा हुआ मूल्य नहीं मिल रहा है। अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों को दो हजार से भी कम दामों में फसल खरीदी जा रही है। समर्थन मूल्यों में बढ़ोतरी मात्र एक दिखावा रहा है। किसान आने वाले विधानसभा चुनाव में माकूल जवाब देंगे।
जिला उपायुक्त यशपाल का कहना है कि वे इस संदर्भ में जानकारी लेंगे। यदि ऐसा है तो उचित कार्रवाई की जाएगी। सरकारी खरीद जल्द शुरू करा किसानों को सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य ही दिलवाया जाएगा।