पलवल। सर्व कर्मचारी संघ की जिला इकाई बैठक बृहस्पतिवार को रसूलपुर रोड़ स्थित जन स्वास्थ्य विभाग की यूनियन कार्यालय पर संपन्न हुई। बैठक में पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस सहित खाने पीने की आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सरकार की घोर निंदा की गई। कहा गया कि किसान आंदोलन के समर्थक कर्मचारियों को सरकार निलंबित कर रही है।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने केन्द्र सरकार पर आरोप लगाया कि जनता के पैसे से खड़े किए गए सार्वजनिक क्षेत्र को निजी घरानों के हवाले किया जा रहा है। बजट में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को बेचकर सरकार ने 2.70 लाख करोड़ रुपये एकत्रित करने का लक्ष्य रखा है जबकि 2020-21के बजट में विनिवेश से 2.10 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया था। जिसको किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हरियाणा सरकार भाजपा-जजपा के चुनावी घोषणा पत्र में किए ठेका प्रथा समाप्त कर कच्चे कर्मियों को पक्का करने, पुरानी पेंशन बहाल करने, पंजाब के समान वेतन व पेंशन देने, दो लाख नौकरियां हर साल देने, आंगनबाड़ी, आशा व मिड डे मील वर्करों के मानदेय में बढ़ोतरी करने आदि वादों को पूरा करने की बजाय पहले की भर्तियों को रद्द करने, विभाग स्तर पर एक एजेंसी को मैन पावर के ठेका देने के नाम पर कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है। किसान आंदोलन के समर्थन में बोलने वाले कर्मचारियों को निलंबित किया जा रहा है। बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान राजेश शर्मा व संचालन सचिव योगेश शर्मा ने किया। इस मौके पर जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनवारी लाल, प्रेस सचिव रमेश चंद, मैकेनिकल वर्कर यूनियन के नेता राकेश तंवर, बिजली कर्मचारी नेता जितेंद्र तेवतिया आदि मौजूद रहे।