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दर्जन भर से ज्यादा गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

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पलवल के गांव टप्पा में घुसा हुआ पानी। - फोटो : Palwal
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हसनपुर/पलवल। हथिनी कुंड बैराज से लगभग 8.28 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जिला पलवल में यमुना से लगते गांवों में बाढ़ का खतरा और अधिक बढ़ गया है। यहां के टप्पा, इंदिरानगर, बिल्लोजपुर, मोबलीपुर, अटवा, गुरवाड़ी, थतरी, प्रहलादपुर, अच्छेजा, बेला, काशीपुर, सुल्तानपुर, मुस्तफाबाद, चंडीगढ़ की ढाणी सहित दर्जन भर से ज्यादा गांवों में पानी घुसने लगा है। अभी तक केवल चंडीगढ़ के गांव ढाणी को खाली कराया गया है। वह भी वहां अधिक पानी घुसने के बाद जिला पुलिस कप्तान नरेंद्र बिजारणिया द्वारा मौके पर जाकर खाली कराया गया। पुलिस कप्तान ने लोगों को समझाकर सुरक्षा को देखते उन्हें गांव खाली करने की अपील की। वहीं उपायुक्त के आदेश पर अच्छेजा में राहत कैंप तो लगा दिया गया लेकिन बुधवार को वहां न तो डॉक्टर थे और न ही खाद्य आपूर्ति विभाग और पशु पालन विभाग से कोई अधिकारी था। इस बात को लेकर ग्रामीणों में खासा रोष था। जिला उपायुक्त ने भी गांवों में जाकर लोगों से बातचीत की तथा हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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यमुना में छोड़े गए पानी के कारण बढ़ रहे बाढ़ के खतरे की आशंका को लेकर उन गांवों के लोग बेहद डरे हुए हैं, जिनमें पानी घुसना शुरू हो गया है तथा आगे पानी और बढ़ने की संभावना है। हालांकि अभी तक वे लोग गांवों से बाहर नहीं गए हैं लेकिन उन्हें पानी आने से उनके आशियाने नष्ट होने तथा नुकसान होने का डर सता रहा है। हालांकि प्रशासन उन्हें हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद से ही गांवों को खाली करने की सलाह दे रहा है ताकि कोई नुकसान न हो, लेकिन ग्रामीण अभी तक गांवों में डटे हुए हैं। कई गांवों में तो पशुओं के चारे का संकट बनने लगा है, क्योंकि अधिकांश चारा खेतों में पानी घुस आने से खराब हो गया है, लेकिन उसके बाद भी ग्रामीण वहां से नहीं हट रहे हैं।
इंदिरा नगर में रहने वाले ग्रामीण रामजीलाल, नरवीर व सतवीरी का कहना है कि यमुना के जल स्तर से उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी, यदि रास्ता सही हो जाए। रास्ते के खराब रहने के कारण पानी आने पर निकल नहीं पाते हैं। उन्हें नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। रास्ता बन जाएगा तो कोई परेशानी नहीं होगी। बताया गया कि यमुना के जल स्तर बढ़ने से बाढ़ आने पर एक हजार, 60 एकड़ जमीन पानी में डूब जाएगी। इन लोगों का कहना है कि सरकार व प्रशासन उनके लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा दे तो इस तरह की दिक्कत कभी न आएं तथा न उन्हें गांवों को खाली करके जाना पड़ेगा।
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उपायुक्त यशपाल ने कहा कि यमुना नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जिला प्रशासन लोगों की मदद को हर समय तत्पर है। अगर किसी परिस्थिति में ग्रामीणों को मदद पहुंचानी पड़ी तो इसके लिए प्रशासन ने सभी तैयारियां पूर्ण कर रखी हैं। उपायुक्त ने बुधवार को स्वयं नदी के साथ लगते गांवों का निरीक्षण किया तथा ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें आश्वस्त किया कि अभी खतरे जैसी कोई स्थिति नहीं है। उपायुक्त पहले गांव इंदरा नगर पहुंचे तथा गांवों में पानी का स्तर देखा तथा ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने गांव अच्छेजा के राजकीय स्कूल में बाढ़ राहत शिविर बनाया हुआ है, जहां लोगों के लिए ठहरने की व्यवस्था की हुई है। उन्होंने कहा कि गांव के रास्ते पर मिट्टी डालने तथा तटबंद मजबूत करने का कार्य किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से उन्हें हरसंभव मदद पहुंचाने की व्यवस्था की हुई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्वयं भी नदी के जलस्तर को देखते रहे, सचेत रहें। कोई परेशानी आती है तो प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों को जानकारी दें ताकि समय पर मदद पहुंचाई जा सके। इसके बाद उपायुक्त गांव गुरवाड़ी में पहुंचे तथा यमुना के जलस्तर को देखा। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि यमुना नदी के पानी में बच्चों, पशुओं को जाने से रोकें। पशुओं को खुला न छोड़े। नदी किनारे के कच्चे मकानों में न रहें तथा न ही सोएं। नदी पार जाने का प्रयास न करें। कोई भी परिस्थिति आने पर प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों को सूचना दें।
उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि मेरी फसल, मेरा ब्यौरा योजना के तहत अपनी फसल का पंजीकरण अवश्य करवाएं, ताकि फसल के नुकसान की भरपाई का उन्हें फायदा मिल सके। इस अवसर पर उनके साथ एसडीएम जितेंद्र कुमार, तहसीलदार रोहताश, नायब तहसीलदार प्रेम प्रकाश व सिंचाई विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
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