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Palwal News: गांव में तेंदुए के घूमने से ग्रामीणों में भय, संसाधनों की कमी के कारण विभाग पकड़ने में विफल

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- वन विभाग के पास चार जिलों के लिए केवल दो पिंजरे, उन्हें भी बार-बार किया जाता है स्थानांतरित
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- कई दिनों से सर्च अभियान चला रहा वन्य जीव संरक्षण विभाग
- जिलाधीश ने नियुक्त किए ड्यूटी मजिस्ट्रेट, ग्रामीणों से सावधान रहने की अपील
- पशुओं को अंदर बांध रहे, बच्चों व बुजुर्गों को भी घर से बाहर नहीं जाने दे रहे ग्रामीण

संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। जिले में तेंदुए की सूचना ने कोहराम मचाया हुआ है। बार-बार गांवों में तेंदुआ दिखने से लोगों ने भय का माहौल है। गांव अलावलपुर में युवकों पर हमले की बात सामने आने के बाद लोग और ज्यादा भयभीत हैं। पिछले एक माह से प्रशासन व वन्य जीव संरक्षण विभाग तेंदुए को पकड़ने का प्रयास कर रहे हैं, परंतु संसाधनों की कमी के चलते तेंदुआ पकड़ में नहीं आ रहा है। तेंदुए से बचाव के लिए ग्रामीणों ने अपने स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए। रात के समय गांवों में ठीकरी पहरा शुरू कर दिया, वहीं पशुओं को अंदर बांधा जा रहा है। बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों का खेतों की तरफ जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। गांव धतीर के बाद अब गांव अलावलपुर में तेंदुआ देखा गया है। हालांकि, जिला उपायुक्त ने लोगों के बचाव के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की है।
तेंदुआ सबसे पहले हथीन के गांव स्यारौली व कानोली में देखा गया था। उसके बाद गांव सदरपुर के गांवों में देखा गया। अब पिछले दिनों से गांव धतीर में देखे जाने की सूचनाएं आ रही हैं। शुक्रवार सुबह गांव अलावलपुर में तेंदुआ कुछ युवकों ने देखा। युवकों का कहना है कि तेंदुआ ने उनके ऊपर हमला किया तो वे घर के अंदर घुस गए, जिससे उनकी जान बच गई। गांव अलावलपुर निवासी सुरेंद्र, वीरेंद्र ने तेंदुआ घर के पास देखा था। तेंदुआ किसी को नुकसान नहीं पहुंचा पाया। वहीं, सदरपुर में जगदीश पर तेंदुआ ने छह जनवरी को हमले का प्रयास भी किया था। इससे इन गांवों के आसपास के लोगों में काफी भय बना हुआ है।
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संसाधनों की कमी से जूझ रहा वन जीव संरक्षण विभाग
जानकारी के अनुसार पलवल सहित फरीदाबाद, नूंह व गुरुग्राम जिला वन जीव संरक्षण विभाग गुरुग्राम के अंतर्गत आता है। एक इंस्पेक्टर पर चार जिलों का कार्यभार है। उनके पास केवल दो पिंजरे हैं, जिन्हें तेंदुए को पकड़ने के लिए लगाया है। दूसरी जगह से सूचना मिलने पर इन पिंजरों का स्थानांतरित कर दिया जाता है। इससे तेंदुआ पकड़ में नहीं आ रहा है। ज्यादातर तेंदुआ गन्ने के खेत में छिप जाता है, जिसे बाहर निकालने का कोई विकल्प नहीं है। वह रात के समय ही खेत से निकलता है और लोगों को दिखता है। हालांकि, वन विभाग की टीम निरंतर सर्च अभियान चला रही है। जहां-जहां तेंदुआ देखा गया है व जिन ईख के खेताें में पशुओं की हड्डियां मिली हैं, वहीं, पिंजरे लगाए गए हैं, लेकिन अभी तक तेंदुआ जाल में नहीं फंसा है।
जिलाधीश ने किए ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त

जिलाधीश डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने जिले के गांवों में तेंदुआ दिखाई दिए जाने के बाद ग्रामीणों की सुरक्षा व गांव बढ़राम, सदरपुर व अलावलपुर में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए थाना चांदहट प्रबंधक को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की तेंदुए से सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सजग एवं मुस्तैद है। उन्होंने आह्वान किया है कि ग्रामीण तेंदुआ को रेस्क्यू करने में जिला प्रशासन का सहयोग करें। ग्रामीण तेंदुए से डरे नहीं बल्कि सावधान व सतर्क रहें और किसी भी प्रकार की अफवाह से बचें।
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तेंदुआ को लेकर लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। विभाग के पास संसाधनों की कमी है, फिर भी पूरा प्रयास किया जा रहा है। अन्य केंद्रों से पिंजरे मंगवाए जा रहे हैं। जल्द ही तेंदुए को काबू कर लिया जाएगा। - कृष्ण कुमार, इंस्पेक्टर, वन जीव संरक्षण विभाग
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