फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डीएपी के बढ़े दामों से किसान चिंतित, सरकार के प्रति दिख रहा गुस्सा

विज्ञापन
विज्ञापन
पलवल। डीएपी की कीमत में एकाएक 700 रुपये की बढ़ोतरी से जहां किसानों को चिंता होने लगी है, वहीं सरकार के खिलाफ गुस्सा भी नजर आने लगा है। किसानों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर किसानों को दबाने का काम कर रही है। गेहूं पर समर्थन मूल्य बढ़ाया मात्र 30 रुपये, जबकि डीएपी पर 700 रुपये बढ़ा दिए गए। ऐसे में किसान कहां से खेती कर पाएगा। किसानों ने मांग की है कि डीएपी के रेट कम हों।
विज्ञापन

वहीं विपक्षी नेताओं ने भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि किसानों की फसल के इतने कम दाम मिल रहे हैं, घर चलाना मुश्किल है। ऊपर से पहले ही बैंकों के कर्जे हैं। इस तरह से दाम बढ़ते रहे तो खेती करना ही छोड़ना पड़ेगा।
क्या कहते हैं किसान
. सरकार ने डीएपी के दाम बढ़ाकर किसानों के साथ गलत किया है। यदि सरकार ऐसे ही दाम बढ़ाती रही तो मजबूरी में किसानों गोबर की खाद का प्रयोग करना पड़ेगा, फिर चाहे फसल कम हो। सरकार नहीं चाहती है कि किसान कमाई करें। - बीर सिंह किसान, आमरू
विज्ञापन

. सरकार की नीति व नियत बिल्कुल साफ नहीं है। सरकार कहती कुछ है और करती कुछ है। सरकार दावे तो करती है कि किसानों की आय दोगुना होगी, लेकिन जिस तरह डीएपी की कीमत 700 रुपये बढ़ाई जा रही है, इससे आय दोगुुना तो दूर किसान खुद कर्जे में डूबने लगेगा। - हरिओम शास्त्री, किसान ताराका
. सरकार को डीएपी की इतनी ज्यादा कीमत बढ़ाने से पहले किसानों के बारे में सोचना चाहिए था। किसान पहले ही कर्जे में डूबा हुआ है। कभी गलत कृषि कानून तो कभी बीज के दामों में वृद्धि और अब डीएपी के दाम बढ़ा दिए। ऐसे में किसान का खेती करना मुश्किल हो रहा है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। - श्रीपाल किसान
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें