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अमृतसर से लौटी संगत का किसानों ने किया स्वागत

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पलवल। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर कृषि कानूनों के विरोध में चल रहा धरना जारी रहा। शनिवार को ग्वालियर के गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ का जत्था अमृतसर से वापस आते समय धरना स्थल पर रुका। धरना स्थल पर किसानों ने जत्थे का स्वागत किया। इस दौरान जत्थे में शामिल संगत ने धरने पर लंगर छका और किसान आंदोलन में अपने विचार रखे। संगत में शामिल सरदार बाबा देवेंद्र सिंह, गुरु बलवंत सिंह, सरदार कुलवंत सिंह, डाक्टर हरमन चीका, तेजेंद्र सिंह भिंड, हरप्रीत सिंह, दलसेर कौर, करतार सिंह सहित अन्य ने बताया कि मुगल बादशाह जहांगीर द्वारा ग्वालियर किले में बंद 52 राजाओं को छठे सिख गुरु हरगोविंद साहब ने रिहा करवाया। गुरुजी अमृतसर पहुंचे तो वहां दीपमाला की गई थी। इस दिन को सिख पंथ दाता बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है।
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किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता ताराचंद किशोरपुर ने की, जबकि संचालन राजकुमार ओहलियान ने किया। धरने में किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि इस सीजन में किसान का धान, बाजरा फसल न बिकने, खाद की भारी कमी और उसकी कालाबाजारी होने आदि की बात कही।
धरने में किसान नेता रघुबीर सिंह, सोहनपाल चौहान, सरदार हरमन सिंह, बलवंत सिंह, शिवसिंह थानेदार, नन्दलाल मोहना, धनीराम थानेदार, चन्द्रमुनि आर्य, हरी नंबरदार, राजेश रावत, सुभाष दलाल, रोशनलाल, समय सिंह कुंडू, सुखराम सौरौत, दलसेर कौर, हरप्रीत सिंह एवं सुखविंद्र सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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