पलवल। केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कमेटी बनाने का किसान संघर्ष समिति पलवल ने स्वागत किया है। इस अलावा 700 किसानों को मुआवजा देना व आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने को लेकर सरकार द्वारा अपने स्तर पर कार्रवाई शुरू करने के कदम को किसानों ने सही बताया है। किसानों का कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर चल रहे धरने की आगामी रूपरेखा मोर्चा द्वारा लिए गए निर्णय के आधार पर ही तय की जाएगी।
पिछले एक साल से केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहा किसानों का आंदोलन बुधवार को भी जा रहा। धरने की अध्यक्षता दरियाब सिंह सहरावत ने की, जबकि संचालन रूपराम तेवतिया ने किया। बुधवार को धरने में सहरावत व बडगुर्जर पाल के गांव गहलब, कलसाड़ा, भंगूरी, भमरौला, घर्रोट, फिरोजपुर सहित अन्य गांवों के किसान भारी संख्या में पहुंचे। धरने को संबोधित करते हुए किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कमेटी बनाने, शहीद किसानों को मुआवजा देने व किसानों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने पर कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसका किसान स्वागत करते हैं। उसके बावजूद भी किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी कानून सहित अन्य मांगों को पूरा होने पर घर वापसी नहीं करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा आगामी आंदोलन को लेकर जो भी निर्णय लेगी, उसके आधार पर ही आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत ने कहा कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा में लिखित में दिया है किसान आंदोलन की वजह से किसी किसान की मौत का कोई रिकॉर्ड नहीं है, जोकि शर्मनाम हैं। पिछले करीब एक साल, चार महीने के दौरान आंदोलन में 700 से अधिक किसानों की जानें गईं। सरकार मुआवजा देने से बचने के लिए यह बहाने बना रही है।
धरने को सोहनपाल चौहान, राजेंद्र घर्रोट, भागीरथ बैनीवाल, श्रीचंद महाशय, चेतराम मैंबर, धर्मचंद्र घुघेरा, सोनू हुड्डा, अच्छेलाल जोधपुर, गोपीचंद हवलदार, चंद्रमुनि धतीर, बीर सिंह चौहान, जयदेव महाशय, रामसिंह ने संबोधित किया।