होडल। उपमंडल में अब भी यूरिया और खाद की किल्लत बनी हुई है। खाद व यूरिया के लिए किसान दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। किसानों ने इस समस्या का पूरी तरह से कृषि विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। विभाग के आला अधिकारी किसानों की समस्या को सुनने को तैयार नही है। यूरिया खाद नही मिलने पर किसान कभी सरकारी एजेंसी तो कभी विभागीय उच्च अधिकारियों के कार्यालयों में चक्कर लगा रहे हैं। सरकारी खाद एजेंसियों ने अपने गेट पर खाद का स्टाक नहीं होने का बोर्ड चस्पा कर दिया है, लेकिन शहर में दर्जनों प्राइवेट खाद विक्रेताओं के यहां किसानों की भीड़ लगी दिखाई देती है। दुकानदार कृषि विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर राजस्थान, मेवात, यूपी के लिए कच्चे रास्तों से खाद की कालाबाजारी करने में लगे हुए हैं।
क्षेत्र के किसानों को खाद की आवश्यकता होती है, उसी दौरान सरकारी एजेंसियों पर खाद की कमी हो जाती है, लेकिन प्राइवेट दुकानदार विभागीय अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर मनमर्जी के रेटों पर किसानों को खाद उपलब्ध कराकर मालामाल हो रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि उच्च अधिकारियों को इस बारे में मालूम न हो, लेकिन अधिकारी भी सब कुछ जानते हुए मौन साधे हुए हैं। शहर में किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए इफ्को और कृभको सरकारी एजेंसियों की व्यवस्था है, लेकिन उसके बावजूद भी किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रहा है। खाद का स्टाक नहीं होने पर एजेंसियों पर या तो ताला लटका मिलता है या फिर शटर डाउन मिलता है।
किसानों का कहना है कि अगर समय पर यूरिया खाद नहीं मिला तो फसल प्रभावित होगी। प्रत्येक वर्ष शहर में खाद की इसी प्रकार किल्लत होती है। खाद के मामले को लेकर दर्जनों किसान पिछले दिनों एसडीएम गजेंद्र सिंह से भी मिल चुके हैं, लेकिन समस्या का अभी तक कोई समाधान नहीं हो सका है। किसानों का कहना है कि प्राइवेट खाद विक्रेता किसानों को खाद के साथ कीटनाशक दवाइयों के लिए बाध्य कर रहे हैं और ऊपर से रेट भी मनमर्जी के ले रहे हैं। किसान गिरधारी, राजाराम, हरि सिंह, पवन, रमेश का कहना है कि यूरिया खाद के लिए वह पिछले कई दिनों से चक्कर काट रहे हैं लेकिन सरकार एजेंसियों पर खाद नहीं मिल पा रहा है जबकि प्राइवेट खाद विक्रेता कीटनाशक दवाओं के साथ मंहगे रेटों पर खाद उपलब्ध करा रहे हैं।
उपमंडल कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह का कहना है कि खाद की कमी नहीं हैं। किसानों को हर संभव खाद व यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है। अगर कोई विक्रेता तय रेट से ज्यादा दामों में खाद दे रहा है तो उसकी शिकायत करें, कार्रवाई की जाएगी।