धरने में सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते किसान।
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पलवल। नए कृषि कानूनों के विरोध में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहा किसानों का धरना शनिवार को भी जा रहा। धरने में मुख्यमंत्री द्वारा किसानों के लिए अभद्र भाषा प्रयोग करने पर रोष जताया गया। किसानों ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किसानों के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग कर घटिया मानसिकता का परिचय दिया है। किसानों को असामाजिक और शरारती तत्व कहना अन्नदाताओं का अपमान है, जोकि असहनीय है। आगामी चुनावों में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस दौरान किसानों की खिलाफत करने वाले नेताओं का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया। किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता श्रीचंद महाशय औरंगाबाद ने की।
किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान और धर्मचंद घुघेरा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के मुखिया, मंत्री और सलाहकार कृषि कानूनों की कमियां बताने को कहते हैं, ताकि लोगों को गुमराह किया जा सके। संयुक्त किसान मोर्चा ने 11 दौर की वार्ता में पहले ही बहुत विस्तार और तर्कसंगत तरीके से समझा दिया है कि कानूनों में क्या कमियां हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अब भी अपने अहंकार पर खड़ी है। सरकार आंदोलन को लंबा खींचकर उसे थकाना चाहती है, जो सरकार की भारी भूल साबित होगी। किसान नेताओं के इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाने से संकेत मिलता है कि सरकार जनता की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को छीनना चाहती है। उन्होंने कहा कि कृषि कानून वापसी तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। धरने को किसान नेता रमेश चंद सौरौत, दरियाब सिंह, चंद्रमुनी, रूपराम तेवतिया, भागीरथ बेनीवाल, नरेंद्र सहरावत, राजेश रावत बहीन, रणजीत औरंगाबाद, रोशनलाल कुंडू, बीरसिंह औरंगाबाद और जयदेव ने संबोधित किया।