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किसानों का जमीर, जमीन और आजीविका होगी समाप्त

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पलवल। भारतीय किसान यूनियन चढूनी के अध्यक्ष गुरुनाम सिंह चढूनी ने कहा कि कृषि कानूनों के लागू होने पर किसानों का जमीर, जमीन और आजीविका समाप्त हो जाएगी। पंचायत से लेकर संसद तक उसी व्यक्ति को वोट दें, जो किसान आंदोलन में मदद कर रहा हो। जब तक सरकार कृषि कानूनों को निरस्त कर एमएसपी गारंटी बिल की मांग को पूरा नहीं करेगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वह रविवार को अटोहां चौक पर किसान धरने को संबोधित कर रहे थे।
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चढूनी राजस्थान के जुरहैडा में आयोजित पंचायत से वापस लौटने समय पलवल में चल रहे धरने पर रुके। उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानून किसान, किसानी और कृषि के खिलाफ हैं। कानूनों में स्पष्ट लिखा है कि विश्व बाजार से अधिक कीमत पर किसान का उत्पाद नहीं खरीदा जाएगा। कोई भी व्यापारी दुनिया में कहीं से भी खाद्य पदार्थ खरीद कर कहीं भी बेच सकता है। भारत में ही नहीं बल्कि किसी भी देश से खरीदकर भारत में बेच सकता है। किसी भी व्यक्ति को व्यापार और भंडारण करने से रोका नहीं जा सकता है। कांट्रेक्ट फार्मिंग से किसानों को नहीं कंपनियों को फायदा होगा।
किसान आंदोलन में अब तक सरकार से कुछ नहीं मिला है, लेकिन सभी धर्मों और जातियों का भाईचारा बढ़ गया है। सरकार भाईचारे को खत्म करना चाहती थी, लेकिन आंदोलन से उसे नई ताकत मिली है। अभी तक 200 किसानों की आंदोलन के दौरान मौत हो चुकी है। एक संत सहित 12 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। कानून निरस्त नहीं हुए तो आने वाले सैकड़ों साल तक किसान आंदोलन नहीं कर पाएंगे। इस दौरान पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा लिए गए निर्णयों के बारे में पलवल के किसानों को पता नहीं चलता। पलवल में 52 पालों के अध्यक्ष अरुण जेलदार के नेतृत्व में धरना चलाया जा रहा है। इसलिए अरुण जेलदार को किसान संयुक्त मोर्चा के उन 40 नेताओं में शामिल किया जाए, जो केंद्र सरकार से वार्ता में शामिल रहते हैं।
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