फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसान आंदोलन को दबाने पर भड़के किसान

विज्ञापन
विज्ञापन
पलवल। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच कर रहे किसानों पर सरकार द्वारा लाठियां भांजने व पानी फेंकने पर जिले के किसानों में बेहद रोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली आ रहे किसानों को इस तरह से रोकना निंदनीय है। किसानों की हालत सरकार की वजह से आज बेहद खराब है। ऐसे में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा।
विज्ञापन

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत का कहना है कि सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानून किसानों के हित में नहीं है। इनसे किसानों की हालत 120 साल पहले की तरह हो जाएगी। यदि सरकार किसानों का हित चाहती है और इन कानूनों को लागू करना चाहती है तो लिखित में दे कि किसानों की फसल एमएसपी पर बिकेगी। उन्होंने दिल्ली कूच करने वाले किसानों पर पानी फेंकने व लाठियां बरसाने और प्रदेश की सीमाओं को सील करने की घटनाओं की निंदा की।
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला सचिव रूपराम तेवतिया का कहना है कि किसानों के साथ बदमाशों जैसा व्यवहार करना निंदनीय है। किसान शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जा रहे थे, फिर भी सरकार ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। पलवल से जितने भी किसान दिल्ली जा रहे थे, सभी को गिरफ्तार कर धमकी देते हुए वापस पलवल भेज दिया। किसानों का शोषण बर्दाश्त नहीं होगा और यह आंदोलन नहीं रुकेगा।
विज्ञापन

वर्जन-
आज किसानों की हालत बेहद खराब है। जितनी लागत फसल बोने में आती है, उतनी कीमत बाजारों में नहीं मिलती है। इस कानून से किसान पूंजिपतियों के हाथ की कठपुतली बन जाएगा। सरकार को किसानों के बारे में सोचना चाहिए व शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने आ रहे किसानों पर इस तरह का अत्याचार नहीं करना चाहिए। - राम किशन, किसान, होडल
मंडियों में किसानों की फसल को औने-पौने दामों पर खरीदा जाता है। सरकार केवल वादे करती है। आज तक मंडियों में आकर किसानों की हालत किसी ने नहीं देखी है। सरकार पहले ऐसा इंतजाम करे कि मंडियों में आते ही किसान की फसल समर्थन मूल्य पर बिके। इस तरह से आंदोलन को न दबाया जाए। - ओम प्रकाश, किसान
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें