पलवल के अटोहां चौक पर धरना देते किसान।
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पलवल। केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर किसानों का धरना जारी रहा। बृहस्पतिवार को किसानों ने धरना स्थल पर संत कबीर दास की जयंती मनाई। किसानों ने कहा कि कबीर दास ने सभी धर्मों व जातियों को एक माना था। उसी प्रकार किसान व मजदूर एक हैं। उनकी कोई जाति नहीं है। दोनों अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार से अपील की कि किसान व मजदूरों की सभी मांगों को पूरा किया जाए।
किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता सोहनपाल चौहान, जबकि संचालन किशन चंद शर्मा ने किया। किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि संत कबीर दास ने समाज में व्याप्त भ्रांतियों और बुराइयों को दूर करने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया और लोगों में भक्ति भाव का बीज बोया। कबीर दास के दोहे अत्यंत सरल भाषा में थे। आज भी उनके दोहे जीवन जीने की सही राह दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों का आंदोलन निरंतर तेज हो रहा है। शुक्रवार को मथुरा से मशहूर भजन गायक सीमा रावत के नेतृत्व में महिलाओं की टोली धरने में भाग लेगी। क्षेत्र के गांवों से भी महिलाएं शामिल होंगी। भजनों के माध्यम से कृषि कानूनों पर कटाक्ष किए जाएंगे। वहीं 26 जून को खेती बचाओ लोकतंत्र बचाओ दिवस मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं। उस दिन हजारों की संख्या में किसान धरने में शामिल होंगे। धरने को किसान नेता डॉ. रघुवीर सिंह, रूपराम तेवतिया, स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती, राजेंद्र सिंह घर्रोट, चंद्रमुनि धतीर, रणजीत मीतरोल, रोशनलाल अल्लीका, अच्छेलाल जोधपुर, करतार सिंह औरंगाबाद व जयदेव ने संबोधित किया।