नोटबंदी के फैसले के बाद सरकार द्वारा किसानों को बीज खरीद में पुराने 500 व 1000 के नोट स्वीकार करने के सरकारी आदेशों का हथीन मे पालन नहीं हो रहा हैं। इलाके में सरकारी बीज की कोई दुकान भी नहीं हैं। निजी बीज दुकानदार पुराने नोट अभी भी नहीं ले रहे हैं।
किसानों का कहना है कि रबी फसल की 90 प्रतिशत बिजाई का काम पहले ही पूरा हो चुका हैं। जिन किसानों ने अभी अभी कपास की फसलें काटी हैं, वे किसान ही गेहूं की पछेती बिजाई के लिए जुटे हुए हैं। इन किसानों का कहना हैं कि प्राईवेट दुकानदारों को भी पुराने नोट स्वीकार करने के आदेश जारी किए जाएं।
मलाई गांव के किसान जान मोहम्मद ने बताया कि केन्द्र सरकार ने पुराने नोटों पर बीज उपलब्ध कराने की घोषणा देर से की। इलाके में गेहूूूं बिजाई का 80 प्रतिशत काम 20 नवंबर तक ही पूरा हो गया। गांव रूपडाका के किसान सरफूदीन ने बताया कि किसानों ने उधार ले लेकर बिजाई की हैं। अब तो मात्र 10 प्रतिशत ऐसा रकबा हैं। जहां बिजाई होनी हैं। उन्होने मांग की हैं कि भविष्य के लिए ऐसी योजना बनाई जाए जिससे किसानों को जरूरत की चीजों के लिए उधार हेतु भटकना ना पडे़।