बिजली निगम की ओर से भेजा गया दो करोड़ से ज्यादा का बिल।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी का फरमान सरकारी विभागों के लिए रामबाण साबित हो सकता है। हालांकि किसान, मजदूर व व्यापारी सभी नोटबंदी की मार झेल रहे हैं लेकिन सरकारी विभागों के खजाने भर रहे हैं। अधिकांश लोग ब्लैकमनी को जमा कर खुद पर लगी डिफाल्टर की मोहर को धोने में लगे हैं।
नोटबंदी के बाद से अकेले बिजली विभाग में सोमवार तक 5.33 करोड़ रुपए जमा हो चुके हैं। जिनमें से करीब 3.20 करोड़ रुपये तो उन मदों में आए हैं, जिन खातों को विभाग डिफाल्टर की श्रेणी मेें डाल चुका था। करीब 2.13 करोड़ रुपये रूटीन बिलों में वसूले गए हैं।
बिजली विभाग के एक्सईएन पीके चौहान ने बताया कि अभी 24 नवंबर तक प्रतिबंधित 1000-500 के नोट लिए जा रहे हैं, उम्मीद है अभी और भी रिकवरी हो सकती है। विभाग के सीए के अनुसार अधिकांश लोगों ने बंद हो चुके 1000-500 के नोटों से अपने बिल भरे हैं। वहीं नगर परिषद में भी लोग वर्षो पुराने गृहकर को जमा करने के लिए जुट रहे हैं।