संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक ने कहा कि तोरिया (सफेद सरसों) कम समय में पकने वाली तिलहनी फसल है। तोरिया में तेल की मात्रा सरसों से 44 प्रतिशत ज्यादा होती है। जो खेत अगस्त के आखिर व मध्य सितंबर तक चारे वाली फसलों या सब्जियों से खाली हो जाते हैं, उनमें तोरिया उगाकर किसान अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते हैं। डॉ. मलिक गांव रूंधी में आयोजित गोष्ठी में तिलहनी फसल तोरिया उगाने की उन्नत तकनीक बारे में जानकारी दे रहे थे।
डॉ. मलिक ने कहा कि तोरिया की फसल लेने के बाद किसान गेहूं की फसल भी ले सकते हैं। तोरिया की बिजाई का उचित समय अगस्त के अंतिम सप्ताह से मध्य सितंबर तक है। तोरिया के बाद गेहूं की फसल लेनी हो तो बिजाई 10 सितंबर तक पूरी कर लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि तोरिया की टी-9, टीएल-15 तथा टीएच-68 सबसे कम अवधि 85 से 90 दिन में पक कर तैयार हो जाती है। इनकी औसत पैदावार छह क्विंटल प्रति एकड़ है। तोरिया गेहूं फसल चक्र में इन्हीं किस्म की बिजाई करें। सिंचित दशा में तोरिया का सवा किलोग्राम बीज प्रति एकड़ पर्याप्त रहता है। तोरिया की बिजाई लाइनों में 30 सेंटीमीटर का फैसला रखकर बीज को चार से पांच सेंटीमीटर गहरा बोना चाहिए। तोरिया तेल वाली फसल है। इसे गंधक की जरूरत पड़ती है। इसलिए फास्फोरस की खाद सिंगल सुपर फास्फेट डालें, क्योंकि इसमें 12 प्रतिशत गंधक भी होती है। यदि फास्फोरस के लिए डीएपी डालना पड़े तो इसके साथ गंधक पूर्ति के लिए 100 किलोग्राम जिप्सम प्रत्येक एकड़ आखिरी जुताई पर डालनी चाहिए। तोरिया में बिजाई के समय 25 किलो यूरिया, 50 किलो सुपर फास्फेट तथा 10 किलो जिंक सल्फेट प्रति एकड़ डालें।
इस अवसर पर राजकुमार, परमीपंच, पूर्व सरपंच जगदीश, राधेश्याम, योगेश, सुभाष, अशोक, मोनू, ललित, गुरुदत, मनोज मौजूद थे।
दिल के लिए फायदेमंद है तोरिया (सफेद सरसों) का तेल
कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक ने बताया तोरिया का तेल ऑलिव ऑयल की तरह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। दिल की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह तेल उपयुक्त है। एक शोध के अनुसार तेल में शर्करा की मात्रा काफी कम होती है। इसलिए यह टाइप-दो डायबिटीज को बढ़ाने वाले कारक मोनोअनसेच्यूरेटेड फैटी एसिड को शरीर में बढ़ाने से रोकता है। इससे मधुमेह रोगियों का ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है। खाने में रोजाना दो छोटे चम्मच तेल लेना दिल को स्वस्थ रखता है। तोरिया का तेल विभिन्न फैट-सॉल्युबल विटामिन, बीटा-कैरोटीन और ओमेगा तीन व छह फैट्टी एसिड से भरपूर है, जिससे पाचन प्रक्रिया में बदलाव आता है और यह शरीर को गर्माहट प्रदान करता है।