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‘हर शख्स अपने जीवन में छात्र होता है’

Fri, 05 Sep 2014 03:53 PM IST
अमर उजाला पलवल
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आदर्श की मिसाल कहें या जीवन को आकार और सींचने वाला माली
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हमारी प्रेरणा या फिर जीवन में प्रकाशपुंज का साधन, यही तो हैं हमारे उपाध्याय

उपाध्याय यानी जिंदगी का अध्याय लिखने वाला वह शख्स जिसे शिक्षक कहते हैं। यूं तो हर व्यक्ति आज चाहें अधिकारी या मातहत या फिर शिक्षक अथवा व्यापारी हो, वह भी अपने जीवन में कभी छात्र रहा होगा। ऐसा नहीं है कि शीर्ष पर पहुंचकर हम अपने उन शिक्षकों या गुरुओं को भूल जाते हैं। व्यस्त जीवन में भी भले उनके साथ उनके शिक्षक न हों, लेकिन कहीं न कहीं उनके दिए संस्कारों और शिक्षा के माध्यम से वह जुड़े रहते हैं। इस बात की तस्दीक खुद उनकी सफलता करती है। शिक्षक दिवस के अवसर पर पलवल जिले के कुछ शीर्ष अधिकारियों ने सांझा किए अपने छात्र जीवन के अनुभव...
शिक्षा और संस्कार ही हैं जो साथ होते हैं
2008 बैच के आईपीएस और पलवल जिले के एसपी पतराम सिंह आज के दिन अपने पूज्य गुरू श्री श्रीराम शर्मा को याद करते हुए बताते हैं कि वह आज जिस पोजिशन पर हैं, वह उनके गुरु के दिए संस्कारों की देन है। हरियाणा में भिवानी के छोटे से गांव चांद के रहने वाले पतराम बताते हैं कि उनके स्कूल के प्रिंसिपल ही उनके गुरू हैं। सन 67-68 में स्कूल का वो वक्त कभी जेहन से उतरता नहीं। जब गांव की पाठशाला में हिंदी के दो और अंग्रेजी के एक अखबार में से देश की बड़ी खबरों के बारे में सब बच्चों के बीच पढ़कर सुनाया जाता था। बकौल सिंह, हम बच्चे पूरा अखबार अपने हाथ में लेकर पढ़ने की जुगत में रहते थे। शिक्षक दिवस का चलन उस समय कुछ खास नहीं होता था। बस बाल दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस आदि पर स्कूलों में कार्यक्रम होते थे। उसमें ही छात्रों को शिक्षकों का सम्मान करने, उनके आदर्श पर चलने का पाठ सीखाया जाता था। एजुसेट सिस्टम से छात्रों के लिए पीएम और सीएम के संबोेधन पर कहतेे हैं कि हम उस स्कूल में पढ़े जहां बिजली ही नहीं आती थी। फीस के नाम पर महज दस पैसा जमा होता था। आज शिक्षा का ट्रेंड बदल गया है। हम पीएम और सीएम की तस्वीर अखबारों में देखते थे। आज बच्चे लाइव देखेंगे क्योंकि शिक्षा में संसाधन, उपकरण और स्तर बढ़ता जा रहा है।
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  शिक्षक दिवस पर वे अपने गुरु को नमन करते हुए कहते हैं कि श्री श्रीराम शर्माजी आज जहां भी हैं, जैसे भी हैं, जब तक हमारा जीवन रहेगा उनके दिए संस्कारों से आगे बढ़ता रहूंगा और संस्कारों को बच्चों मे बांटता रहूंगा।

तर्क हमेशा वैज्ञानिक हो
असली शिक्षक दिवस तो किताबों के साथ रोज ही मनाता हूं। हर स्टेज पर सीखने को मिलता है। जिनसे सीखने को मिलता है वही हमारे शिक्षक होते हैं। वो चाहें जनता हो या कोई मातहत। ये कहना है पलवल जिले के उपायुक्त केएम पांडुरंग का। वह बताते हैं कि पूना से पढ़ाई की और मेरे गुरु के रूप में जिंदगी को शिक्षा देने वाले शिक्षक बने वामन राव पई जी। कहते हैं, पईजी आज इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन वह ऐसी शिक्षा दे गए जिसके दम पर आज यहां तक पहुंचा हूं। वह कहते थे तर्क हमेशा वैज्ञानिक होना चाहिए। बात चाहें कैसी भी हो। अपने समय में मनाए जाने वाले शिक्षक दिवस का जिक्र करते हुए कहते हैं 1993 में दसवीं पास किया। तब हम इस दिन हाथ से कार्ड बनाकर अच्छे संदेश लिखकर अपने शिक्षकों के सम्मान में उन्हें देते थे। हम सब शिक्षक बनकर स्कूलों में कार्यक्रम करते थे। आज तो सब बदल गया है। अब तो इंटरनेट, मोबाइल और सैटेलाइट का जमाना है। बकौल पांडुरंग, मैं आज के दिन पईजी को सादर नमन करता हूं।

जीवन और जेहन में उतारी है शिक्षा
मैं अपने शिक्षक पीजीआई चंडीगढ़ में प्रोफेसर आईएस जैन का सादर सम्मान करता हूं। वह मेरे मेडिकल टीचर और मेरा आदर्श रहे। उनकी वजह, उनकी शिक्षा और पढ़ाने के तरीकों से ही आज यहां तक पहुंचा हूं। डॉक्टरी पेशा बहुत कठिन है लेकिन जब शिक्षक छात्रों को छात्रों की भाषा में ही समझाता है तो पाठ और आसान हो जाता है। ये कहना है पलवल जिले के चीफ मेडिकल ऑफिसर और नेत्र विशेषज्ञ राजेंद्र प्रसाद का। उनका कहना है कि यूं तो आज लाइफ बहुत व्यस्त हो गई है, मगर कुछ दिन ऐसे हैं जिस दिन हम अपने अपनों को बहुत मिस करते हैं जैसे कि आज का दिन। यहां से चंडीगढ़ की दूरी ज्यादा नहीं है फिर व्यस्तता के कारण मिल नहीं पाता पर आज भी अपने शिक्षक की हर बात को जेहन और जीवन में उतारता हूं। इसके अलावा में विष्णुदत्त जी का भी बहुत सम्मान करता हूं।

हम रोज मनाते हैं शिक्षक दिवस
अस्सी के दशक में शिक्षक दिवस का चलन शुरू हो चुका था लेकिन आज जिस तरह से स्कूलों में आयोजन होते हैं, वैसा नहीं होता। कभी डीजी खान पब्लिक स्कूल के शिक्षक रहे जगदीश चंद्र शास्त्री मेरे जीवन की प्रेरणा हैं जिन्होंने मेरी जिंदगी को समाज सेवा से जोड़ कर एक नया मोड़ दिया। मुझे वह शिक्षा दी जो आज तक मुझे किसी भी परेशानी में डीगा नहीं पाई। ये कहना है जिले में नगर परिषद के चेयरमैन नेत्रपाल का। वह कहते हैं कि वैसे तो परिवार के बुजुर्ग ही सबसे बड़े शिक्षक होते हैं। हम कोई शिक्षक दिवस विशेष रूप से नहीं मनाते बल्कि रोज अपने शिक्षक को सम्मान देकर मनाते हैं। कहते हैं मेरे बचपन के शिक्षक अब रिटायर होकर होडल जाकर रहने लगे हैं। समय-समय पर उनसे मिलता रहता हूं। आज जरूर उनसे बात करूंगा।
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रोज का काम रोज करो
1998 से शिक्षा अधिकारी का पद संभालने वाले अनिल कुमार शर्मा शिक्षक दिवस पर अपने शिक्षक विवेक उपाध्याय जो राजस्थान के पिलानी में रहते हैं, को उनका भविष्य संवारने के लिए धन्यवाद देते हैं। वे कहते हैं कि वैसे तो 1987 से सर्विस शुरू कर दी थी लेकिन मास्टर साहब की शिक्षा और संस्कारों को खुद से कभी अलग नहीं किया। आज के दिन बस उनके स्वस्थ्य रहने की कामना करता हूं। दो साल पहले मिला था। कहते हैं, भगवान करे हर छात्र को ऐसे ही शिक्षक मिलें। बताते हैं कि सन 1981 में जब बिरला पब्लिक स्कूल में 10वीं में पढ़ा करते थे, हमलोगों को ही अनुभव देने के लिए शिक्षक बना दिया जाता था। वही अनुभव है जो आज इस विभाग को संभाल रहा हूं। आज भी उपाध्याय जी को तहे दिल से याद करता हूं। उन्होंने यही शिक्षा दी कि रोज का काम रोज करो और सीधे चलो।
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