20पीएएलपी11- हथीन में टेंकर से पानी भरते हुए लोग।
हथीन में बिजली न आने से नहीं चल पा रहे जन स्वास्थ्य विभाग के ट्यूबवेल
संवाद न्यूज एजेंसी
हथीन। हथीन-पुन्हाना बिजली लाइन के तीन टावरों के गिरने से उपमंडल की पांच लाख की आबादी को न केवल बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है, वहीं पेयजल संकट भी गहरा गया है। स्थिति यह बनी हुई है कि हथीन शहर एवं आसपास के इलाकों में पिछले छह दिनों से सरकारी वाटर सप्लाई का पानी नहीं आया है। जन स्वास्थ्य विभाग के ट्यूबवेलों को बिजली नहीं मिल रही है। इस कारण ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे हैं। बूस्टिंग स्टेशन सूखे पड़े हैं। पांच लाख की जन संख्या प्राइवेट वाटर सप्लायरों के सहारे पानी पीने को विवश है। बिजली न होने की स्थिति में सरकारी वाटर सप्लाई के लिए जिम्मेदार जन स्वास्थ्य विभाग ने वैकिल्पक प्रबंध नहीं किए हैं।
हथीन में वाटर सप्लाई के लिए जनरेटरों की व्यवस्था की मांग की जा रही है। एक ओर जहां सरकारी वाटर सप्लाई विभाग इस मामले में गैर जिम्मेदारी का परिचय दे रहा है, वहीं प्राइवेट वाटर सप्लायरों ने मौके का लाभ उठाना शुरू कर दिया है। प्राइवेट सप्लायरों ने पानी के टैंकरों के रेट बढ़ा दिए हैं। मलाई गांव निवासी मोहम्मद जकरिया ने बताया कि पहले एक टैंकर पानी पांच सौ से छह सौ रुपये में मिल जाता था अब सात सौ रुपये में मिल रहा है। स्थिति यह बनी हुई है कि एक घड़ा पानी 20 रुपये में मिल रहा है। महंगा हुआ पेयजल गरीबों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। गांव रूपडाका के पूर्व सरपंच मोहम्मद हुसैन ने बताया कि लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हथीन नगर पालिका के पार्षद रविन कुमार ने बताया कि गरीबों के लिए परेशानी अधिक बढ़ गई है। उन्होंने मांग की है कि जन स्वास्थ्य विभाग को ट्यूबवेल जनरेटर से चलाकर पेयजल की आपूर्ति करनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि वाटर सप्लाई की व्यवस्था विभाग को टैंकरों से करनी चाहिए। बिजली निगम के गिरे हुए टावर अभी तक खड़े नहीं हुए हैं। इस कारण संकट कई दिनों तक चल सकता है। जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता दीपेंद्र राज ने बताया कि सरकारी ट्यूबवेलों को बिजली नहीं मिल रही है। इस कारण संकट बढ़ा है। जैसे ही बिजली आपूर्ति सामान्य हो जाएगी, पर्याप्त मात्रा में पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।