पलवल। गुरु पूर्णिमा का पर्व शनिवार को जिले में हर्षोल्लास से मनाया गया। शिष्यों ने अपने गुरुजनों की पूजा-अर्चना की व उपहार देकर सम्मानित किया। मंदिरों में विशेष आयोजन तथा भंडारे भी किए गए। विशेष कथा व पाठ भी किए गए।
सबसे बड़ा कार्यक्रम पचोवन मंदिर परिसर में बने हुए खाटू श्याम मंदिर भवन में हुआ। मंदिर में पूरे दिन भजन-कीर्तन चलता रहा। महिलाएं भजनों पर नृत्य करती रहीं तथा हजारों शिष्यों ने महंत कामता दास महाराज व ऋषिदास महाराज की विशेष पूजा अर्चना कर उन्हें भेंट-पूजा देकर सम्मानित किया। इस मौके पर सैकड़ों शिष्यों ने गुरु दीक्षा भी ली।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर रेलवे रोड स्थित खोंटा मंदिर के पुजारी राकेश शास्त्री, जंगेश्वर महादेव मंदिर के महंत राजकुमार, थाईं मोहल्ला स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर के महंत धरनीधराचार्य, तुहीराम कॉलोनी स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में आचार्य परमानंद शास्त्री, कमेटी चौक स्थित देवी माता मंदिर के महंत संजय भारद्वाज का भी उनके शिष्यों ने भेंट व उपहार देकर सम्मानित किया तथा लोगों ने गुरु दीक्षा ली। मंदिरों में शिष्यों की भारी भीड़ दिखाई दी।
महिलाएं मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना करती नजर आई। लोगों ने परिवार सहित गुरुओं की पूजा-अर्चना की। पचोवन में पंचवटी मंदिर के गायकों ने प्रभु भक्ति के भजन प्रस्तुत किए। भजनों ने महिलाओं व बच्चों ने जमकर नृत्य किया। इस दौरान मंदिरों के बाहर लगी दुकानों पर लोगों ने खूब खरीददारी की। बच्चे खिलौने खरीदते नजर आए, तो महिलाएं जरूरत का सामान खरीद रही थीं। मंदिरों के अलावा जगह-जगह गुरु पूर्णिमा के कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्कूलों में भी शिक्षकों को उनके शिष्यों द्वारा सम्मानित किया गया। वहीं जगह-जगह लोगों ने सड़कों पर भी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भंडारे लगाए तथा प्रसाद वितरण किया।
आदिकाल से हमारे समाज ने गुरु की महत्ता को स्वीकारा है। माता बालक की प्रथम गुरु होती है, क्योंकि बालक उसी से सर्वप्रथम सीखता है। गुरु की महत्ता बनाए रखने के लिए ही भारत में गुरु पूर्णिमा को गुरु पूजन या व्यास पूजन किया जाता है। गुरु मंत्र प्राप्त करने के लिए भी इस दिन को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। आप जिसे भी अपना गुरु बनाते हैं, आज के दिन विशेषरूप से उसके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। गुरु के ज्ञान के प्रकाश से जीवन का अंधकार दूर होता है।
- महामंडलेश्वर कामता दास महाराज, पंचवटी मंदिर